March 10, 2026

Hind foucs news

hindi new update

हिजाब पहनी छात्राओं को नहीं देने दी गई परीक्षा, कहा-पहले ड्रेस पहनकर आओ, तो बिफरी छात्राओं ने दी कॉलेज प्रशासन को ‘धमकी’

नई दिल्ली। किसने सोचा था कि जिस हिजाब को मुस्लिम महिलाओं द्वारा विगत हजारों वर्षों से पहना जा रहा है, एक दिन उसे लेकर भी विवादों की बयार बहनी शुरू हो जाएगी।  बिल्कुल सही सोच रहे हैं आप। किसी ने भी नहीं सोचा था। न हमने सोचा था और न आपने सोचा होगा, लेकिन कर्नाटक के जिला उड्डपी स्थित कॉलेज में मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने का मसला पहले राजनीतिक बना, फिर मजहबी और फिर इसका अंतरराष्ट्रीयकरण हुआ। इस मसले को तूल देने का काम किसने किया और किसने नहीं। इस पचड़े में न पड़ते हुए आपको बताते चले कि कथित तौर पर कॉलेज प्रशासन ने मुस्लिम छात्राओं को ड्रेस कोड में आने के लिए कहा था, लेकिन छात्राओं ने निर्देशों की अवहेलना करते हुए मजहबी पोशाकों को वरियता देते हुए शैक्षिक संस्थानों के नियमों की धज्जियां उड़ाने से भी कोई गुरेज नहीं किया।

दरअसल, खबर है कि उड्डपी स्थित कॉलेज में कुछ छात्राएं हिजाब पहनकर परीक्षा देने पहुंची थी, लेकिन छात्राओं के हिजाब पहनने पर शिक्षण संस्थान की तरफ से आपत्ति जताते हुए इन्हें परीक्षा देने से मना कर दिया गया, जिसके बाद ये छात्राएं परीक्षा देने की जिद्द पर अड़ गईं। वहीं, जब इन छात्राओं को परीक्षा देने से रोक दिया गया, तो इन्होंने स्कूल प्रिंसिपल परीक्षा रद्द कराने की मांग की। यही नहीं, इन छात्राओं ने प्रिंसिपल द्वारा मांग नहीं माने जाने पर पुलिस में शिकायत दर्ज करने की भी बात कही। कॉलेज प्रशासन द्वारा परीक्षा नहीं दिए जाने से खफा हुईं छात्राओं ने कहा कि विगत कई माह से हमारी पढ़ाई ठप है। उनकी कक्षाएं नहीं लग पा रही है। उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। जैसे-तैसे यूट्यूब वीडियो के जरिए अपनी पढ़ाई को जारी रखे हुए हैं। आज बड़ी ही उम्मीदों के साथ अपनी प्रैक्टिकल परीक्षाएं देने आए हुए थे, लेकिन हमारी पोशाक पर आपत्ति जताते हुए हमें परीक्षा नहीं देने दिया गया है, जिससे हमें भविष्य खतरे में है, लेकिन शिक्षण संस्थान को इससे कोई फर्क पड़ता है।

छात्राओं ने कहा कि शिक्षण संस्थान ने हमारे जेहन में पल्लवित हो रहे सपनों को पूर्ण होने से पहले बिखेर कर रख दिया। विदित हो कि तकरीबन 11 दिनों की सुनवाई के उपरांत कोर्ट ने उक्त प्रकरण पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायपालिका द्वारा इस मसले को लेकर किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा गया है। जहां छात्राओं की तरफ से हिजाब पहनने की जिद्द की जा रही है, तो वहीं शिक्षण संस्थान की तरफ से ड्रेस कोड के पालन करने की बात जा रही है। अब यह भी हर मसले की भांति कोर्ट की दहलीज पर दस्तक दे चुका है।

अब ऐसे में देखना होगा कि आगे चलकर यह पूरा मामला क्या रूख अख्तियार करता है। ध्यान रहे कि बीते दिनों इस मसले को लेकर जमकर राजनीतिक होती भी हुई दिखी थी। राजनीतिक नुमाइंदों का इसे लेकर दो धड़ों में बंट चुका है, जहां एक तरफ हिजाब पहनने की पैरोकारी की जा रही थी, तो वहीं दूसरी तरफ ड्रोस कोड का पालन करना अनिवार्य बताया जा रहा है। कुल मिलाकर इस मसले के सहारे सियासी नुमाइंदों ने जमकर सियासी रोटियां सेंकी। खैर, अब इस पूरे मसले को लेकर बतौर पाठक आपका क्या कुछ कहना है। आप कमेंट कर बताना बिल्कुल भी मत भूलिएगा और अगर आपके पास उक्त संदर्भ में कोई विचार है, तो आप हमारे साथ साझा भी कर सकते हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *