March 11, 2026

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BJP Wins UP: यूपी में CM योगी ने जो कहा वो हुआ सच, बीजेपी ने दशकों पुराने इन दो मिथकों को किया ध्वस्त

लखनऊ। यूपी की सियासत से जुड़े दो मिथक हैं। पहला तो ये कि यहां 30 साल से किसी पार्टी ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल नहीं की। दूसरा मिथक है कि जो भी सीएम नोएडा जाता है, वो कुर्सी गंवा देता है। ये दोनों ही मिथक बीजेपी की दोबारा यूपी में हुई जीत से टूट गए हैं। न सिर्फ लगातार दूसरी बार बीजेपी ने सत्ता हासिल की, बल्कि सीएम योगी एक दर्जन से ज्यादा बार नोएडा जाकर भी दोबारा सरकार बनवाने में सफल होते दिख रहे हैं। बाकायदा सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि वो ऐसे मिथकों पर भरोसा नहीं करते और रुढ़ियों को तोड़ने में यकीन रखते हैं। आज उनका ये दावा सच साबित हो गया है।

यूपी की राजनीति से जुड़े दो खास मिथक अर्से से लोगों के बीच चर्चा का केंद्र रहे हैं। पहला तो ये कि साल 1985 के बाद कोई पार्टी ऐसी नहीं रही, जिसने लगातार दो बार सरकार बनाई हो। ये भी खास बात है कि यूपी को 21 सीएम मिले। जिनमें कांग्रेस के 13 नेता शामिल हैं, लेकिन संयोग ऐसा भी रहा कि कांग्रेस ने अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यकाल तक पूरा नहीं करने दिया। पांच साल अगर कांग्रेस ने सरकार चलाई, तो अपना सीएम बदलने का काम भी उसने किया। फिर भी यूपी से जुड़ा एक और मिथक सबसे अहम माना जाता है। ये मिथक गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा से संबंधित है।

यूपी में नोएडा से जुड़ा मिथक ये है कि जो भी सीएम नोएडा का दौरा करता है, वो सत्ता गंवा देता है। उसकी सत्ता में वापसी नहीं होती। इस वजह से तमाम सीएम नोएडा जाने से बचते रहे हैं, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मिथक को दरकिनार कर कई बार नोएडा का दौरा किया। उन्होंने और पीएम नरेंद्र मोदी जब भी नोएडा गए, तो इस मिथक की चर्चा की और इसी बहाने विपक्ष पर जमकर निशाने भी साधे। वैसे इतिहास इस मिथक की वजह बना।

वीर बहादुर सिंह नोएडा गए थे, तो उनकी सीएम की कुर्सी चली गई थी। एनडी तिवारी साल 1989 में नेडा गए थे, लेकिन चुनाव में कांग्रेस के हारने से वो भी सीएम नहीं रहे। इसी तरह कल्याण सिंह और मुलायम सिंह यादव भी जब नोएडा गए, तो सीएम की कुर्सी गंवा बैठे। इस मिथक का इतना जबरदस्त प्रभाव यूपी की सियासत में देखा गया कि राजनाथ सिंह को जब नोएडा में बतौर सीएम फ्लाईओवर का उद्घाटन करना था, तो ये काम उन्होंने दिल्ली से किया। सीएम रहते मायावती और अखिलेश यादव भी कभी नोएडा नहीं गए।

 

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