नई दिल्ली। दिल्ली में अलग-अलग वजहों से 6 जून से लेकर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। जिसकी वजह से दिल्ली में कारोबार को हजारों करोड़ का नुकसान हो चुका है। चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज (सीटीआई) ने कहा है कि दिल्ली में सिर्फ अक्टूबर के महीने में ही विरोध प्रदर्शनों की वजह से कारोबारियों को करीब 3000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। सीटीआई ने दिवाली तक विरोध प्रदर्शनों पर रोक की मांग की है। सीटीआई ने मांग की है कि भविष्य में धरना प्रदर्शनों के लिए रोहिणी, बुराड़ी और द्वारका में स्थायी स्थल बनाए जाएं। साथ ही पुलिस से मांग की है कि वो दुकान बंद करने का दबाव न डाले, बल्कि बाजार खुले रखने के लिए सुरक्षा दे। साथ ही अक्टूबर में हुए नुकसान के लिए व्यापारियों को राहत पैकेज, बिजली-पानी के बिल और GST में छूट देने की मांग भी सीटीआई ने की है।
दिल्ली में नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ 6 जून से 25 जुलाई 2026 तक जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन चला था। उस दौरान भी सेंट्रल दिल्ली के व्यापारियों ने हर रोज 100 से 300 करोड़ रुपए के नुकसान का दावा किया था। इसके बाद अक्टूबर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कांग्रेस और एक संगठन ने लगातार जंतर-मंतर समेत सेंट्रल दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किए। विरोध प्रदर्शन के कारण दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार और फिर 17 अक्टूबर को लगातार दो दिन कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद किया। इससे भी इस इलाके और आसपास दुकानदारों का व्यवसाय चौपट हुआ।
दिल्ली में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों से कारोबार चौपट होने से परेशान दुकानदारों ने सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो इस बारे में 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा था कि सभी पक्षों को देखना चाहिए कि किसी का नुकसान न हो। वहीं, अब केंद्र सरकार ने दिल्ली के बड़े बाजारों के पास स्थित जंतर-मंतर को भी विरोध प्रदर्शनों के लिए तय जगह से हटा दिया है। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई है। अगर सुप्रीम कोर्ट जंतर-मंतर को डी-नोटिफाई करने के केंद्र के फैसले को सही ठहराता है, तो इस इलाके में विरोध प्रदर्शन नहीं हो सकेंगे। जिससे कारोबारियों को राहत मिलेगी।
