मुंबई। डोनाल्ड ट्रंप जब पहली बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे, तो पाकिस्तान पर निशाना साधते थे। ट्रंप ने ये तक कहा था कि अमेरिका से पैसा लेकर पाकिस्तान उसे बेवकूफ बनाता है। ट्रंप उस वक्त भारत के बहुत करीबी दिखते थे, लेकिन अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने पाकिस्तान से गलबहियां शुरू कर दी। खासकर भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रंप पाकिस्तान को काफी तवज्जो दे रहे हैं। आखिर ट्रंप पाकिस्तान पर मेहरबान क्यों हैं? इस सवाल पर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मजबूरी बताई है।
सीएनएन न्यूज18 चैनल को दिए इंटरव्यू में मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका हर कहीं आतंकवाद के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हम उन सभी के खिलाफ है, जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। रूबियो ने कहा कि उनको विदेश नीति संभालनी होती है। जिसके लिए मतभेदों के बावजूद कई देशों से रिश्ते रखने होते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मामले में भी ऐसा ही है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान से संबंध रखने ही होंगे। क्योंकि परमाणु हथियार वाला देश है। साथ ही पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति के कारण भी उससे बातचीत जरूरी है। उन्होंने भारत और ईरान के बीच रिश्तों और बातचीत का उदाहरण भी दिया।
मार्को रूबियो ने कहा कि पाकिस्तान से अमेरिका के रिश्ते सकारात्मक भी हो सकते हैं। क्योंकि अगर संबंध हैं, तो हम उनसे बात कर सकते हैं, उन चीजों को शायद रोकने में मदद कर सकें, जिनके बारे में भारत चिंता जताता रहा है। पहली बार ऐसा हुआ है, जब अमेरिकी सरकार के प्रतिनिधि ने कहा है कि पाकिस्तान से मजबूरी में उनका देश रिश्ता रखता है। दरअसल, पाकिस्तान की स्थिति ऐसी है कि वो चीन का करीबी है और मुस्लिम देशों कतर और सऊदी अरब का भी। अमेरिका हमेशा ही पाकिस्तान से दोस्ताना रवैया रखता रहा है। यहां तक कि अमेरिका ने उसके दिए हथियारों से भारत के खिलाफ युद्ध करने पर भी पाकिस्तान को कभी कुछ नहीं कहा। अब रूबियो ने साफ कर दिया कि दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्कों में से एक पाकिस्तान के सामने मजबूर है।
