नई दिल्ली। केंद्र सरकार विदेशी अंशदान विनियमन कानून (एफसीआरए) में बदलाव पर अपना रवैया ढीला नहीं करने वाली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार एफसीआरए कानून में बदलाव करने की दिशा में बढ़ेगी। खबर के मुताबिक सरकार सिर्फ जेपीसी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। जेपीसी की सिफारिशों पर नजर डालने के बाद सरकार जरूरी समझेगी, तो बिल में बदलाव करने या न करने का फैसला करेगी।
एफसीआरए संशोधन बिल 2026 को केंद्र सरकार ने 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया था। फिर सदस्यों की मांग पर 12 अगस्त को एफसीआरए संशोधन बिल को समीक्षा के लिए जेपीसी को भेजा गया। 31 सदस्यों की जेपीसी को एफसीआरए संशोधन बिल पर संसद के शीतकालीन सत्र के पहले हफ्ते तक रिपोर्ट देनी है। एफसीआरए संशोधन बिल में एक प्रावधान विदेशी धन से बनाई गई संपत्तियं के मैनेजमेंट और निपटारे के लिए नामित प्राधिकरण बनाने का है। चर्च और विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। उनकी आशंका है कि इस प्रावधान के जरिए सरकार चर्च की संपत्तियों पर कब्जा कर सकती है।
चर्च के प्रतिनिधियों ने एफसीआरए संशोधन बिल के इस प्रावधान पर अपनी आशंका जताने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की थी। वहीं, एफसीआरए संशोधन बिल पर विचार कर रही जेपीसी के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने कहा था कि प्रस्तावित एक्ट के मुख्य प्रावधान वही हैं, जो यूपीए सरकार की ओर से साल 2010 में लागू कानून में शामिल थे। जेपीसी ने एफसीआरए संशोधन बिल पर ईसाई समेत सभी समुदायों से बातचीत की है। एफसीआरए के तहत भारत में काम करने वाले एनजीओ, सामाजिक संस्थाओं और संगठनों को विदेश से मिलने वाली फंडिंग के इस्तेमाल के लिए तय नियम मानने होते हैं। इस कानून से विदेशी फंडिंग नियंत्रित करने के साथ ये सुनिश्चित किया जाता है कि धन का उपयोग तय नियमों के तहत ही हो। एफसीआरए के तहत फंडिंग जुटाने के वास्ते गृह मंत्रालय से एनओसी लेना जरूरी है।
