नई दिल्ली। ताजिकिस्तान के दुशान्बे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट की बैठक में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, आतंकवाद, शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरा है। टेररिज्म के कारण न केवल निर्दोष लोगों के जीवन को हानि पहुंचती है बल्कि यह निवेश, वाणिज्य और युवाओं के भविष्य को भी प्रभावित करता है। आतंकवाद के लिए कोई जस्टिफिकेशन नहीं हो सकता है। आतंकवाद से निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं हो सकता है और उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं हो सकती है जो आतंकवादियों को फाइनेंस, सपोर्ट या अन्य मदद उपलब्ध कराते हैं। टेररिज्म के पूरे इकोसिस्टम को सामूहिक रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।
राजनाथ बोले, पिछले पच्चीस सालों ने SCO को एक मजबूत आधार दिया है। अब हमें इसी आधार पर हमारी आगे की रुपरेखा बनानी है । भारत एक ऐसा SCO चाहता है जो आम सहमति से काम करे और नतीजे दे I भारत इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए मेंबर स्टेट्स के साथ काम करता रहेगा। भारत यह भी मानता है कि SCO को कुशल बने रहना चाहिए और इसमें संप्रभुता, समानता, सहमति और पारस्परिक सम्मान के सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए। ज्यादा संस्थाओं का मतलब ज्यादा उपलब्धियों नहीं होती है। मेंबर स्टेट्स को प्रेक्टिकल वेल्यू देने पर फोकस करना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने कहा, हमें फिजिकल कनेक्टिविटी से परे भी देखना चाहिए। सरलीकृत सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, डिजिटल दस्तावेजीकरण, कुशल लॉजिस्टिक्स और अंतरसंचालनीय डिजिटल समाधान हमारे पूरे क्षेत्र में व्यापार करने की लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं। SCO को इस तरह के व्यावहारिक उपाय पर अधिक से अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत, इस वर्ष के अंत में, पहले SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम की मेजबानी करेगा I हम सभी SCO सदस्य देशों को, इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हैं।
