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दाऊद इब्राहिम उसी देश में है जहां लादेन मिला और मारा गया था, UN को भारत का दो टूक जवाब

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नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक विशेष प्रतिवेदक (स्पेशल रैपोर्टियर) बेन सॉल की रिपोर्ट में गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी को भारत-आधारित आपराधिक समूह बताए जाने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दो टूक शब्दों में करारा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने कहा कि 2003 में, सुरक्षा परिषद ने ‘डी-कंपनी’ नामक एक आपराधिक समूह के नेता को अल-कायदा से जुड़े होने के कारण सूचीबद्ध किया था। दाऊद इब्राहिम, 1993 से ही भारत में आतंकी हमलों के मामले में वांछित है और वो 2003 में लिस्टिंग से बहुत पहले ही भारत से भाग गया था। इसी दौरान, हमारे देश के बाहर रहते हुए, उसे अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन से जुड़े होने के कारण सूचीबद्ध किया गया था। आज भी, वह मेरे देश में एक वांछित अपराधी है। संयुक्त राष्ट्र की सूची के अनुसार, वह उसी देश में रह रहा है जहां ओसामा बिन लादेन मिला था और मारा गया था।

पुरी ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल अन्य मंचों पर भी इस बात पर अपनी गंभीर चिंता जताता रहा है कि विशेष प्रतिवेदक ऐसी रिपोर्टें जारी करते हैं जिनमें तथ्यात्मक गलतियां होती हैं, और इसके लिए उन्हें कभी जवाबदेह नहीं ठहराया जाता। यह सदस्य देशों के सामने एक ऐसी स्थिति खड़ी कर देता है जिसे बदला नहीं जा सकता, यह इस संगठन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, जो पहले से ही अपनी वैधता (legitimcay) को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के विभिन्न हिस्सों में स्पष्ट पूर्वाग्रह दिखता है, ईमानदारी और निष्पक्षता के उच्चतम मानकों का पालन किया जाना चाहिए। ऐसा लगता है कि आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों के लिए अपने गलत कामों को सही ठहराने के लिए मानवाधिकारों और आतंकवाद-विरोधी ढांचे का इस्तेमाल करना एक चलन बन गया है। मानवाधिकारों का ढांचा आतंकवाद फैलाने वालों और कट्टरपंथ व चरमपंथ को बढ़ावा देने वालों के लिए शरणस्थली नहीं बन सकता।

भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी बोले, जहां तक ​​पाकिस्तान के प्रतिनिधि के अभी दिए गए बयान की बात है, तो इस कमरे में मौजूद हर व्यक्ति जानता है कि मेरे देश के खिलाफ, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बारे में कही गई बातें भी शामिल हैं, जो कुछ भी कहा गया है, वह पूरी तरह से दुष्प्रचार है, जिसका मकसद केवल संकीर्ण राजनीतिक लाभ हासिल करना है और यह सब पाकिस्तान के असली शासकों, यानी वहां की सेना के इशारे पर हो रहा है। मैं फिर से दोहराना चाहूंगा कि, यह दर्ज किया जाए कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग हैं, हमेशा से रहे हैं और हमेशा रहेंगे। मैं पाकिस्तानी प्रतिनिधि के बयान पर कोई और टिप्पणी करके उसे कोई महत्व नहीं देना चाहता।

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