दिल्ली

‘बिना बीमा वाली गाड़ियों से हादसा होने पर अंतरिम मुआवजा क्यों नहीं?’, केंद्र की योजना पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल

शेयर करें:

नई दिल्ली। बिना बीमा वाली गाड़ी से हादसा होने पर मुआवजा नहीं मिलता। इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सड़क हादसों में जान गंवाने वालों के परिजनों और गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को तुरंत आर्थिक मदद देने की केंद्र की योजना पर सवाल खड़े कर ये पूछा है कि अंतरिम मुआवजे की योजना का फायदा सिर्फ बीमा वाली गाड़ियों से हादसों तक ही क्यों रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में सड़क और परिवहन मंत्रालय को इस तरह की योजना तैयार करने के लिए कहा था।

दरअसल, केंद्र सरकार ने कंपनसेशन टू विक्टिम्स (इंटरिम रिलीफ) स्कीम 2026 का प्रस्ताव किया है। इस योजना के तहत सड़क हादसों में जान गंवाने वालों के परिवार को 2 लाख रुपए और गंभीर रूप से घायलों को 1 लाख रुपए की अंतरिम आर्थिक मदद का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पाया कि केंद्र सरकार की इस योजना की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इस योजना का प्रचार भी नहीं किया गया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वो योजना के बारे में लोगों को जानकारी दे। ताकि वे सड़क हादसों के मामलों में अंतरिम मुआवजा ले सकें। जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस विश्वनाथन की बेंच में सुनवाई के दौरान सड़क और परिवहन मंत्रालय की ओर बताया गया कि इस योजना को केंद्र ने इस साल 23 फरवरी को ही राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों की सरकारों से साझा किया था।

मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि योजना को केंद्रीय मोटर वाहन एक्ट के प्रावधानों के तहत ही सूचीबद्ध किया जाएगा। मंत्रालय ने सिर्फ बीमा वाली गाड़ियों से हादसा होने पर ही अंतरिम मुआवजा देने के बारे में कहा कि इस योजना को बीमा वाले वाहनों से संबंधित मोटर वाहन एक्ट के प्रावधानों के हिसाब से तैयार किया गया है। कोर्ट को बताया गया कि वाहन का बीमा न होने पर सड़क हादसों के पीड़ित को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण जाना होगा। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने योजना के छठे प्रावधान पर गौर किया। इस प्रावधान में कहा गया है कि हादसे के पीड़ित या मरने वालों के कानूनी वारिस तय किए गए पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इस आवेदन में दुर्घटना दावा अधिकरण में दाखिल दावों की जानकारी भी देनी होगी। सड़क और परिवहन मंत्रालय ने कोर्ट को बताया कि मोटर वाहन एक्ट की धारा 164 के तहत मौत या गंभीर घायल के मामले में बिना गलती साबित किए मुआवजा देने का प्रावधान है। इस धारा के तहत मौत होने पर 5 लाख और गंभीर घायल होने पर 2.5 लाख रुपए मुआवजा बनता है। मुआवजे का दावा करने वाले को ये साबित करने की जरूरत नहीं होती कि हादसा वाहन मालिक की गलती या लापरवाही से हुई। मंत्रालय ने कोर्ट को बताया कि दुर्घटना दावा अधिकरण के आदेश पर अंतिम मुआवजा ज्यादा भी दिया जा सकता है।

Ad Zone: in_content

आगे क्या पढ़ें AI

अपनी राय रखें