नेपाल में सामूहिक तौर पर दफनाए जा रहे शव, लगातार बढ़ रही भयावह बाढ़ से मरने और लापता होने वालों की संख्या
काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को भयावह बाढ़ आई थी। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ के कारण मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नेपाल सरकार ने 788 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी है। जबकि, लापता लोगों की तादाद अब भी 2500 से ज्यादा है। इनकी तलाश की जा रही है। तमाम शवों की हालत खराब होने के कारण पहचान नहीं हो सकी है। ऐसे शवों का डीएनए सैंपल लेकर एयर टाइट बैग में भरकर सामूहिक तौर पर दफनाया जा रहा है। वहीं, सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश भी तेज हुई है।
नेपाल में हजारों परिवारों के लोग अपनों की तलाश के लिए अस्पतालों और मॉर्चुरी के बाहर इकट्ठा हो रहे हैं। अस्पतालों और मॉर्चुरी के बाहर घायलों और मृत लोगों की जानकारी दी जा रही है। इनकी तस्वीरें और लिस्ट में नाम देखकर नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोग परिजनों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल की सेना और प्रशासन ने अब तक करीब 9500 लोगों को सुरक्षित निकाला है। नेपाल सरकार की तरफ से 26 राहत कैंप लगाए गए हैं। जिनमें अपना आशियाना गंवा चुके लोगों को रखा गया है। नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में सैटेलाइट मोबाइल फोन भेजे हैं। क्योंकि भोटेकोशी नदी के बहाव में मोबाइल टावर भी नष्ट हुए हैं।
नेपाल में ये विनाशकारी बाढ़ तिब्बत सीमा पर एक ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिरने से आई थी। बाढ़ के पानी की रफ्तार इतनी थी कि पक्के मकानों तक को नष्ट कर दिया। दर्जनों पक्के और झूला पुल, पनबिजली बनाने के लिए कंक्रीट से तैयार बांध और सड़कों को भी भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की बाढ़ बहा ले गई। दूरदराज के इलाकों तक पहुंच बनाने के लिए नेपाल सरकार हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन वहां तक राहत पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल सरकार का अनुमान है कि राहत और बचाव में काफी दिन लगेंगे। भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के बचाव दल भी नेपाल पहुंचे हैं। भारत का दल पनबिजली परियोजनाओं की बन रही सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने में मदद दे रहा है।
