नेपाल पीएम बालेन शाह ने विदेशी रेस्क्यू टीमों की सहायता लेने से किया इनकार, मृतकों का आंकड़ा और बढ़ा
नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या अब तक 469 तक पहुंच गई है। 1000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। 288 भारतीयों और कई अन्य विदेशी नागरिकों का भी कुछ अता पता नहीं है। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। इस बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विदेशी रेस्क्यू टीमों की सहायता लेने से मना कर दिया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर क्षेत्री के अनुसार हमारी सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं, फिलहाल किसी दूसरे देश के मदद की आवश्यकता नहीं है।
दरअसल भारत, चीन समेत अन्य देशों ने अपनी एडीआरएफ टीमों को रेस्क्यू के लिए भेजने की पेशकश की थी। नेपाल ने कहना है कि हमें दूसरे देशों के अनुरोध को अस्वीकार करना पड़ा। अब तक लगभग 1600 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत के द्वारा पिछले दो दिनों में 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है। इस राहत सामग्री में दवाइयां और खाने के पैकेट भी शामिल हैं। आपको बता दें कि गुरुवार शाम चीन की ओर से एक चेतावनी जारी कर बताया गया था कि नेपाल में एक और खतरे के लिए आगाह किया गया था।
चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर छोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम एक बैरियर लेक बन गई है जो यह ओवरफ्लो हो रही है। इसकी वजह से 50 लाख घन मीटर पानी तीन दिनों में नेपाल में सैलाब बन कर आ सकता है। फिलहाल इस बैरियर झील पर नजर रखी जा रही है। वहीं नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने नुवाकोट जिले के बिदुर नगरपालिका पहुंचकर हालात का जायजा लिया। कुल मिलाकर नेपाल में बाढ़ प्रभावित इलाकों में हर तरफ अभी भी तबाही का मंजर है। न जाने कितने ही घर, गांव, पुल, इमारतें सब जमींदोज हो गई हैं।
