‘महिलाओं को घरों में रहना चाहिए वरना…’, केरलम के इस्लामी संगठन के निर्देश पर विवाद के आसार
कोच्चि। केरलम के प्रमुख सुन्नी संगठन समास्ता केरल जम-इय्यतुल उलमा के कांथापुरम गुट के महासचिव एपी अबुबकर मुसलियार और अध्यक्ष ई. सुलेमान मुसलियार ने कहा है कि इस्लामी कार्यक्रमों में महिलाओं को नहीं लाना चाहिए। मुसलियार ने धार्मिक कार्यक्रम कराने वालों से अपील की है कि वे इस्लामी नियमों का सख्ती से पालन करें और सार्वजनिक स्थानों पर युवा महिलाओं को उन पुरुषों के बीच लाने से बचें, जिनका पारिवारिक रिश्ता नहीं है।
कांथापुरम गुट ने कोच्चि में रविवार को इस्लामिक कॉन्फ्रेंस की। जिसमें कहा गया कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से बड़ी तबाही होगी। उन्होंने कहा कि ऐसी तबाही रोकने के लिए ही इस्लाम में महिलाओं के लिए पर्दा प्रथा जरूरी किया है। कांथापुरम गुट ने कहा कि पवित्र कुरान में कहा गया है कि महिलाओं को घरों में रहना चाहिए। उनको सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आना चाहिए। इस्लामी विद्वानों ने कहा कि जानकार लोगों ने बीते 100 साल में ऐसी बातें सिखाई हैं। इसलिए आपको ये समझना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि इसी वजह से इस देश की महिलाओं ने सम्मान और गरिमा बनाए रखी है। कार्यक्रम में ये भी कहा गया कि महिलाओं को कार्यक्रमों में लाना श्रद्धालुओं के लिए उचित न होने के साथ ही इसे मंजूरी भी नहीं है। कांथापुरम ने स्थानीय मस्जिदों और समुदायों के पदाधिकारियों के अलावा संगठनों के नेताओं से भी सतर्क रहने की अपील की।
कार्यक्रम में अन्य नेताओं ने कहा कि सभी कार्यक्रम धार्मिक मूल्यों और अनुशासन के तहत होने चाहिए। कांथापुरम संगठन ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के बीच नैतिकता की मिसाल पेश करने की जिम्मेदारी सभी की है। उन्होंने सभी संस्थाओं और मदरसों के प्रबंधकों को हिदायत दी कि वे जिम्मेदारी लें कि कोई भी सार्वजनिक उत्सव धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन न करे। कांथापुरम गुट की ओर से महिलाओं के बारे में दिए गए निर्देश पर सियासत के गर्माने के आसार हैं। बीते कुछ साल से हिजाब का विवाद भी छिड़ा हुआ है। हिजाब का मसला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था। हालांकि, अदालतें कहती रही हैं कि हिजाब इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।
