March 10, 2026

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Fact: पूरे जम्मू-कश्मीर और असम के 9 जिलों की हकीकत, Majority में हैं लेकिन अल्पसंख्यक के फायदे ले रहे मुस्लिम

नई दिल्ली। फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के सफल होने और इसे देखने के लिए सिनेमाहॉल्स में लगी भीड़ के बाद एक बार फिर तमाम लोग देश में मुस्लिमों की बढ़ती आबादी की बात करने लगे हैं। सोशल मीडिया पर ये चर्चा तेजी पकड़ रही है। मुसलमानों को भारत में वैसे अल्पसंख्यक का दर्जा हासिल है, लेकिन जम्मू-कश्मीर और असम की बात करें, तो जम्मू-कश्मीर में जहां मुसलमानों की आबादी हिंदुओं से कहीं ज्यादा है। वहीं, असम के 9 जिलों में भी वे बहुमत में हैं। इसके बावजूद इन सभी जगह मुसलमानों को अल्पसंख्यक ही माना जा रहा है और उसी हिसाब से फायदे भी मिल रहे हैं। ऐसे में आपको हम बताने जा रहे हैं कि देश के इन दोनों राज्यों का हाल क्या है। इससे पहले ये बताना जरूरी है कि ‘पीव फोरम ऑन रिलिजन एंड पब्लिक लाइफ’ नाम की संस्था ने एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया था कि साल 2030 तक भारत में कुल आबादी का 16 फीसदी मुस्लिम हो सकते हैं। इससे भारत में इंडोनेशिया और पाकिस्तान से ज्यादा मुस्लिम आबादी हो जाएगी। फिलहाल मुस्लिम आबादी के लिहाज से इंडोनेशिया सबसे बड़ा मुल्क है।

जम्मू-कश्मीर में मुसलमान 68 फीसदी हैं और हिंदू महज 28 फीसदी ही रह गए हैं। 1986 से पहले तक राज्य में हिंदू और खासकर कश्मीरी पंडितों की तादाद अच्छी खासी थी, लेकिन लगातार हमले, नरसंहार और जबरन भगाए जाने की वजह से यहां हिंदू नाममात्र के रह गए हैं। वहीं, असम के 9 जिलों में मुसलमानों की आबादी भी हिंदुओं से ज्यादा है। असम के इन जिलों का नाम बारपेटा, करीमगंज, मोरीगांव, बोंगाईगांव, नौगांव, धुबरी, हाइलाकांदी, गोआलपाड़ा और दारांग है। असम के इन जिलों में मुसलमानों की आबादी बढ़ने की मुख्य वजह बांग्लादेश से होने वाला घुसपैठ माना जाता है। एक दौर था, जब असम में 100 फीसदी हिंदू आबादी थी। अब वहां हाल ये है कि असमिया भाषा बोलने वाले महज 40 फीसदी लोग रह गए हैं। राज्य के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने तो ये तक कहा है कि राज्य में 35 फीसदी मुस्लिम हैं और ऐसे में उन्हें अब अल्पसंख्यक नहीं माना जा सकता।

खास बात ये है कि जम्मू-कश्मीर और असम के जिन जिलों में मुसलमानों की तादाद हिंदुओं या अन्य समुदायों से ज्यादा हो गई है, वहां भी उन्हें अल्पसंख्यकों का दर्जा मिल रहा है और इसी तरह की सुविधाएं भी हासिल होती रही हैं। इस मामले में बीजेपी के नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है कि जहां मुसलमानों की आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है, वहां उन्हें अल्पसंख्यक न माना जाए। इस अर्जी पर अभी तक सुप्रीम कोर्ट में एक बार भी सुनवाई नहीं हुई है।

 

 

 

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