June 21, 2026

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अंधेरे में डूबा पाकिस्तान, विदेशों से कोयला खरीदने के लिए भी नहीं बचे पैसे, बिजली सप्लाई हुई ठप!

नई दिल्ली। इस समय पाकिस्तान बिजली की समस्या से जूझ रहा है। वैसे तो ऊर्जा आपूर्ति की कमी का सामना पूरी दुनिया कर रही है। लेकिन इस समय पड़ोसी देश पाकिस्तान ईधन की कमी और तकनीकी बाधाओं के कारण गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। जहां पहले 21,500 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता था, वहीं अब 15,500 मेगावाट का उत्पादन हो रहा है, जिसकी वजह से देश में 6000 मेगावाट कम बिजली का उत्पादन हो रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि कुल 33,000 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन क्षमता में से पनबिजली प्लांट 1000 मेगावाट, निजी क्षेत्र के बिजली प्लांट 12000 मेगावाट जबकि ताप विद्युत प्लांट 2,500 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। पाकिस्तान के कई बिजली प्लांट बंद हो चुके हैं, जिससे वहां बिजली का संकट गहराया है। यही वजह है कि वहां रोजाना 10 घंटे तक बिजली गुल रहती है। सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, 33,000 मेगावाट की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में से, जल विद्युत संयंत्रों ने 1,000 मेगावाट, निजी क्षेत्र के बिजली संयंत्रों ने 12,000 मेगावाट का उत्पादन किया, जबकि थर्मल पावर प्लांटों ने केवल 2,500 मेगावाट का उत्पादन किया, जिसकी वजह से पाकिस्तान को इस क्षेत्र में लगभग 10 अरब रुपये का दैनिक नुकसान झेलना पड़ा है।

नई दिल्ली। इस समय पाकिस्तान बिजली की समस्या से जूझ रहा है। वैसे तो ऊर्जा आपूर्ति की कमी का सामना पूरी दुनिया कर रही है। लेकिन इस समय पड़ोसी देश पाकिस्तान ईधन की कमी और तकनीकी बाधाओं के कारण गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। जहां पहले 21,500 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता था, वहीं अब 15,500 मेगावाट का उत्पादन हो रहा है, जिसकी वजह से देश में 6000 मेगावाट कम बिजली का उत्पादन हो रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि कुल 33,000 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन क्षमता में से पनबिजली प्लांट 1000 मेगावाट, निजी क्षेत्र के बिजली प्लांट 12000 मेगावाट जबकि ताप विद्युत प्लांट 2,500 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। पाकिस्तान के कई बिजली प्लांट बंद हो चुके हैं, जिससे वहां बिजली का संकट गहराया है। यही वजह है कि वहां रोजाना 10 घंटे तक बिजली गुल रहती है। सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, 33,000 मेगावाट की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में से, जल विद्युत संयंत्रों ने 1,000 मेगावाट, निजी क्षेत्र के बिजली संयंत्रों ने 12,000 मेगावाट का उत्पादन किया, जबकि थर्मल पावर प्लांटों ने केवल 2,500 मेगावाट का उत्पादन किया, जिसकी वजह से पाकिस्तान को इस क्षेत्र में लगभग 10 अरब रुपये का दैनिक नुकसान झेलना पड़ा है।

पाकिस्तान का आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है, उस पर बढ़ती महंगाई की वजह से इमरान को सत्ता से बेदखल होना पड़ा था, लेकिन लोगों को महंगाई से किसी भी तरह की राहत मिलती नहीं दिखाई दी। नेशनल इलेक्ट्रिक पावर रेगुलेटरी अथारिटी (नेप्रा) ने बिजली दरों में प्रति यूनिट 4.80 पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोत्तरी की है। नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बिजली वितरण कंपनियों को अनुमति दी है कि वो उपभोक्ताओं से शुल्क को बढ़ाकर वसूलें। इसके बाद से बिजली वितरण कंपनियां सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं से अप्रैल के बिल में फरवरी के लिए ईधन लागत समायोजन (एफसीए) बढ़ाकर वसूलेंगी यही नहीं, पाकिस्तान में गैस, कोयला और फर्नेस ऑयल से चलने वाले कई बिजली संयंत्रों को भी बंद कर दिया गया है। पाकिस्तान में बिजली की कमी का ये कारण भी अहम कारणों में से एक है। बिजली की भारी किल्लत झेल रहे पाकिस्तान में बंद किए गए कुछ बिजली संयंत्रों में 525MW उत्पादन क्षमता वाला नंदी पावर प्लांट, 840MW उत्पादन क्षमता वाला मुजफ्फरगढ़ पावर प्लांट और अन्य कई पावर प्लांट शामिल हैं।

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