देश 100 साल पुराने राजद्रोह कानून पर कांग्रेस सरकारों की चुप्पी, अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर मोदी सरकार को बदनाम करने की साजिश
नई दिल्ली। अगर आपके जेहन में सुप्रीम कोर्ट से संदर्भित गतिविधियों से अवगत होने की आतुरता रहती है, तो वर्तमान में आपको कोर्ट में विचाराधीन राजद्रोह कानून के मसले के बारे में तो पता ही होगा कि कैसे इसे लेकर बहस का क्रम जारी है। वैसे उपरोक्त कानून को लेकर शुरू से ही विवादों की बयार बहती दिखी है, लेकिन हाल ही में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल की याचिका ने राजद्रोह कानून को लेकर नए सिरे से बहस की स्थिति पैदा कर दी है।
फिलहाल आज कोर्ट ने राजद्रोह कानून पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि जो लोग उपरोक्त कानून के तहत सलाखों के पीछे हैं, वे जमानत के लिए अर्जी दाखिल कर सकते हैं। इसे लेकर आगे की सुनवाई जुलाई में तय की गई है। अब ऐसी स्थिति में उपरोक्त कानून को लेकर कोर्ट का क्या रुख अख्तियार करता है। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन उससे पहले कुछ लोगों द्वारा इस कानून के निष्प्रभावी होने के फैसले को केंद्र सरकार की पराजय के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है।
कुछ लोगों द्वारा यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि उपरोक्त राजद्रोह कानून के निरस्त होने में केंद्र सरकार की पराजय निहित है व इसके प्रभावी रहने में केंद्र की विजयी निहित है। जिसे लेकर अब एक ट्विट सामने आया है, जिसमें स्थिति को बखूबी स्पष्ट करने की कोशिश की गई है। आइए, जरा इसके बारे में हम आपको विस्तार से बताते हैं और इसके बाद हम आपको राजद्रोह कानून के बारे में भी बताएंगे।
तो इस ट्वीट में मोदी सरकार और राजद्रोह कानून के संदर्भ में कहा गया है कि, ‘भारतीय मीडिया का एक वर्ग एसजी वोम्बटकेरे बनाम यूओआई के मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बारे में जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है, इसे असंतुष्टों की जीत और सरकार के लिए नुकसान के रूप में पेश कर रहा है, जब यह बिल्कुल विपरीत है – पीएम द्वारा लिए गए स्टैंड का समर्थन और समर्थन @नरेंद्र मोदी -यहाँ है क्यों।
