February 17, 2026

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Booker Prize: हिंदी साहित्यकार गीतांजलि श्री ने रचा कीर्तिमान, ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ के लिए मिला अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

नई दिल्ली। हिंदी साहित्यकार गीतांजलि श्री ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया हैं। उन्हें अंतर्राष्ट्रीय बुकर प्राइज से सम्मानित किया गया हैं। पहली बार एक हिंदी उपन्यास ‘Tomb of stand’ के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही यह हिंदी का पहला उपन्यास है जिसे अंतर्राष्ट्रीय बुकर प्राइज मिला है। गीतांजलि का यह उपन्यास मूल रूप से हिंदी शीर्षक के नाम से प्रकाशित हुआ था। यह उपन्यास भारत के विभाजन की छाया में स्थापित एक कहानी है, जो अपने पति की मृत्यु के बाद एक बुजुर्ग महिला की कहानी को दर्शाता है। गीतांजलि श्री कई लघु कथाओं और उपन्यासों की लेखिका हैं। उनके 2000 के उपन्यास माई को 2001 में क्रॉसवर्ड बुक अवॉर्ड के लिए चुना गया था।

भारतीय भाषा की पहली किताब

बुकर प्राइज एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार है, जिसे अंग्रेजी में ट्रांसलेट और ब्रिटेन या आयरलैंड में प्रकाशित किसी एक पुस्तक को हर साल दिया जाता है। इस पुस्तक की पुरस्कार की घोषणा सात अप्रैल को लंदन बुक फेयर में की गई थी। ‘डेजी रॉकवेल ने रेत समाधि’  का अंग्रेजी में अनुवाद किया है। किसी भी भारतीय भाषा में लिखी अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिलने वाली पहली किताब है। पुरस्कार में 50 हजार पाउंड यानी भारतीय मूल लगभग 50 लाख रुपये की राशि दी जाती है, जिसे लेखक और अनुवादक के बीच आधा-आधा बांटा जाएगा।

अनुवादक फ्रैंक वाएन उस निर्णायक मंडल के अध्यक्ष थे, जिसने पुरस्कृत रचना चुनी। वाएन ने कहा कि निर्णायकों ने एक जोश भरी बहस के बाद पूरे उत्साह के साथ ‘टूंब ऑफ सैंड’ को पुरस्कार के लिए चुना। ‘रेत समाधि’ 80 बरस की उम्र पार कर चुकी एक महिला की कहानी है, जो परंपराओं की बेड़ियां तोड़कर 1947 के बंटवारे के दौरान के अपने अनुभवों का सामना करती है।

रेत समाधि का परचम लहराया

रेत समाधि के साथ पांच और किताबें इस रेस में दौड़ रही थी। जिनमें पोलैंड की नोबेल पुरस्कार विजेता ओल्गा तोकारश्चुक के अलावा अर्जेंटीना की क्लाउडिया पिन्योरो और दक्षिण कोरिया के बोरा चुंग भी शामिल हैं। पुरस्कार समारोह लंदन में हुआ।

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