April 30, 2026

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PM मोदी के खिलाफ तीस्ता और अहमद पटेल की साठगांठ के खुलासे पर गरमाई सियासत, बीजेपी ने घेरा तो कांग्रेस बोली…

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार रहे अहमद पटेल से 30 लाख रुपए लेकर गुजरात में तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश का आरोप गुजरात पुलिस की एसआईटी ने कथित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ पर लगाया है। इस आरोप में अहमद पटेल का नाम आते ही बीजेपी अब कांग्रेस पर सीधे निशाना साध रही है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि गुजरात दंगों के मामले से अपने हाथ धोने के लिए ये पीएम नरेंद्र मोदी की एक और तरकीब है। इसी के तहत मरहूम अहमद पटेल पर मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं।

बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि ‘तीस्ता सीतलवाड़ ने गुजरात की तत्कालीन सरकार को अस्थिर करने के लिए जो किया और जिस तरह से कांग्रेस की शह पर श्री मोदी को फंसाने की कोशिश की, वो सीधे तौर पर राजनीति के कारण दिखती है। तीस्ता को शुरू में करीब 30 लाख रुपए कांग्रेस ने दिए। इसका मतलब साजिश का मूल पैसा और सत्ता की भूख रही।’

बीजेपी के एक और राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने लिखा, ‘कांग्रेस मुख्य किरदार, अहमद पटेल सूत्रधार, तीस्ता सीतलवाड़ कलाकार? नया खुलासा उन आरोपों को सही ठहराता है कि तीस्ता, संजीव वगैरा की तरफ से चलाए जा रहे प्रोपेगेंडा के कुटीर उद्योग को राजनीतिक समर्थन का हाथ था। गुजरात को बदनाम करने की कांग्रेस की राजनीतिक कोशिश।’

वहीं, बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट में लिखा कि तीस्ता सीतलवाड़, आरबी श्रीकुमार और संजीव भट्ट ने अहमद पटेल की शह पर उस वक्त गुजरात के सीएम रहे नरेंद्र मोदी को गलत तरीके से फंसाने और सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की। आज पटेल का निधन हो चुका है और मोदी पीएम हैं। इसे कर्म कहते हैं।

बीजेपी की तरफ से हो रही हमलों की इस बौछार के बाद कांग्रेस की तरफ से पार्टी के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश का बयान आया। जयराम रमेश ने ट्वीट में लिखा, ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मरहूम अहमद पटेल पर लगाए जा रहे गलत आरोपों का खंडन करती है। गुजरात के सीएम रहते जो सांप्रदायिक दंगा हुआ, उससे खुद को अलग रखने की प्रधानमंत्री की ये रणनीति है। उनकी अनिच्छा की वजह से दंगा हुआ और तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें राजधर्म का पाठ पढ़ाया था।’ जयराम ने आगे लिखा है कि प्रधानमंत्री की सियासी बदले की मशीन अब उन राजनीतिक विरोधियों को भी नहीं छोड़ रही है, जो दिवंगत हो चुके हैं। एसआईटी अपने राजनीतिक आका के इशारे पर नाच रही है।

 

 

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