बॉम्बे हाईकोर्ट ने मानहानि के केस की सुनवाई 2046 तक टाली, जानिए क्यों अदालत ने अपनाया ये रुख?
मुंबई। मानहानि के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक ऐसा कदम उठाया, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मानहानि के मामले की सुनवाई 2046 तक टाल दी। कोर्ट ने कहा कि अगले 20 साल इस केस को सुना ही नहीं जाना चाहिए। मानहानि का केस 90 साल की महिला और उनकी बेटी की ओर से साल 2017 में दाखिल किया गया था।
साल 2017 में सोसाइटी में मरम्मत और रखरखाव के लिए फंड जमा किया जा रहा था। उसी दौरान बुजुर्ग को बैठक में डिफॉल्टर कह दिया गया। इस पर बुजुर्ग महिला ने मानहानि का केस कर दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस जीतेंद्र जैन ने 20 अप्रैल 2026 की सुनवाई में दोनों पक्षों को सलाह दी थी कि समझौता कर केस को खत्म कर दें। कोर्ट ने कहा था कि जिनके खिलाफ मानहानि का केस है यानी प्रतिवादी बिना शर्त माफी मांग लें। जब मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में फिर सुनवाई हुई, तो सोसायटी के पूर्व सदस्यों ने बताया कि वे बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार हैं, लेकिन 90 साल की बुजुर्ग ने समझौता करने से इनकार कर केस जारी रखने की बात कही।
बुजुर्ग महिला के इस रुख के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस जैन ने सख्त रुख अपनाया और कहा कि वो इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते, सिवाय इसके कि मानहानि के मामले को अगले 20 साल तक लिस्ट न किया जाए। उन्होंने एक पन्ने के आदेश में ये बात लिख दी कि साल 2046 तक इस मामले में सुनवाई न हो। कोर्ट ने कहा कि ये उन मामलों में है, जहां पक्षकारों के बीच अहंकार की लड़ाई है। जिसकी वजह से कोर्ट अन्य अहम मसलों को प्राथमिकता के आधार पर नहीं देख पा रहा। पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी कोर्ट ने मामले की सुनवाई को 20 साल बाद के लिए टाला है। इस मामले में कोर्ट ने सख्त रुख इसलिए अपनाया, क्योंकि 90 साल की उम्र के बावजूद बुजुर्ग महिला माफी स्वीकार करने के लिए तैयार ही नहीं हुईं।
