राजेन्द्र कुमार का जन्मदिन आज, पाकिस्तान से भारत आते ही मिली पुलिस विभाग में जॉब, जिसे छोड़ मुंबई भाग आए एक्टर
नई दिल्ली। 60 के दशक के मशहूर एक्टर राजेंद्र कुमार जी का आज जन्मदिन है। ये एक ऐसे एक्टर है, जिन्होंने 4 दशक के लंबे करियर में बॉलीवुड को कई हिट फिल्में दी है। 60 के दशक में तो एक वक्त ऐसा भी आया कि उनकी 6-7 फिल्में एक ही वक्त पर सिनेमाघरों में सिल्वर जुबली मना रहीं थीं। यहीं से उनका नाम जुबली कुमार पड़ गया। पाकिस्तान से भारत आने के बाद राजेंद्र कुमार की नौकरी पुलिस विभाग में लग गई थी लेकिन किस्मत में तो एक्टर बनना लिखा था। इसी घड़ी में उनके एक दोस्त ने उन्हें फिल्मी दुनिया का सपना दिखाकर मुंबई जाने के लिए कहा। हर बच्चों की तरह राजेंद्र का भी बचपन से एक्टर ही बनने का सपना था। फिर क्या, दोस्त की बातों में आकर वो पुलिस की ट्रेनिंग में जाने से दो दिन पहले ही मुंबई भाग गए फिर मुंबई में आकर उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत की और यहीं से उनका फिल्मी संघर्ष शुरु हुआ।
राजेन्द्र की फिल्मी दौर की शुरुआत
एक्टर पहली बार फिल्म जोगन में नजर आए थे। राजेन्द्र को फिल्मों में काम तो मिल गया पर उन्हें वो पहचान नहीं मिली जो वो चाहते थे। उनके करियर को पंख फिल्म मदर इंडिया से मिली। भले ही इस फिल्म में उनका रोल छोटा सा था पर उनके काम की जमकर तारीफ हुई। फिर 1963 में उनकी फिल्म ‘मेरे महबूब’ सुपरहिट हुई जिसके बाद राजेन्द्र ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 80 से ज्यादा फिल्मों में काम किया जिसमें से 35 फिल्में सिल्वर जुबली हिट रही। वहीं ‘कानून’ और गुजराती फिल्म ‘मेहंदी रंग लाग्यो’ के लिए राजेंद्र कुमार को जवाहरलाल नेहरू से नेशनल अवॉर्ड भी मिला। 3 साल तक राजेन्द्र को लगातार फिल्मफेयर में बेस्ट एक्टर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया जिसमें 1969 में राजेंद्र को पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। साल 1963 से 1966 के दौरान उनकी सभी फिल्में बड़े पर्दे पर छाई रही।
राजेन्द्र ने दुनिया को कहा अलविदा
एक वक्त था जब हर डायरेक्टर राजेन्द्र को अपनी फिल्म में लेना चाहता था। लेकिन 70 का दशक आते ही उनका चार्म फीका पड़ गया और उनकी हालत बिगड़ती चली गई जिस कारण उन्हें अपना लकी बंगला भी राजेश खन्ना को बेचना। ये सितारा 12 जुलाई 1999 को दुनिया को अलविदा कह गया और बॉलीवुड ने एक सितारा खो दिया।
