US-India: PM मोदी की मजबूत रणनीति ने चीन के खिलाफ अमेरिका का साथ कराया हासिल, S-400 की खरीद पर छूट के ये हैं मायने
नई दिल्ली। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने बिल पास कर भारत को रूस से मिल रहे एस-400 वायु रक्षा प्रणाली के मामले में काट्सा कानून से छूट की मंजूरी दे दी है। ये बिल अब सीनेट में पास होकर राष्ट्रपति जो बाइडेन के पास जाएगा। प्रतिनिधि सभा से बिल पास होने के कारण भारत और अमेरिका के रिश्ते और बेहतर होने के आसार हैं। रक्षा विशेषज्ञ मारूफ रजा ने हिंदी अखबार ‘अमर उजाला’ में अपने लेख में कहा है कि ये हैरानी की बात नहीं है। अमेरिकी हथियार उद्योग की शह पर रूस विरोधी तत्वों की प्रतिबंध लगाने की धमकियों के बावजूद भारत ने मॉस्को के साथ 5.4 अरब डॉलर के रक्षा सौदे को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
मारूफ ने लिखा है कि एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली भारत के रक्षा बलों के लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि यह रक्षा प्रणाली चीन के पास है, जिसने पहले ही भारत-चीन सीमा पर इसे तैनात कर दिया है। दूसरी बात, वैश्विक बाजार में तुलनात्मक रूप से रूसी कीमत पर ऐसी प्रणाली उपलब्ध नहीं है। यह दुनिया की सबसे उन्नत वायु रक्षा प्रणाली है। ये सभी तरह के आकाशीय खतरों से सुरक्षा दिलाती है। अमेरिका ने पहले इसी रक्षा प्रणाली को खरीदने पर तुर्की के खिलाफ प्रतिबंध लगाए थे। इसके लिए बाकायदा डोनल्ड ट्रंप के समय काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट यानी काट्सा लागू किया गया था।
यूक्रेन का हिस्सा रहे क्रीमिया पर रूस ने जब 2014 में कब्जा जमा लिया, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने उसके हथियारों की बिक्री को सीमित करने की कोशिश शुरू की। इसी दौरान तुर्की ने एस-400 खरीदा था। चीन ने भी यही प्रणाली खरीदी, लेकिन अमेरिका ने उस पर प्रतिबंध नहीं लगाए। इसकी वजह चीन और अमेरिका के व्यापारिक रिश्ते हैं। अब चीन के खिलाफ ताल ठोक रहे भारत को भी वो काट्सा की रियायत देने की तैयारी कर रहा है। बता दें कि भारत लगातार रूस से हथियार खरीदता है और हमारे पास 60 से 70 फीसदी हथियार रूस के ही बने हैं। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने इसकी पहल की कि भारत को एस-400 के मामले में काट्सा से छूट मिले।
