Delhi: सीबीआई जांच का आदेश होते ही केजरीवाल सरकार में मचा हड़कंप, नई आबकारी नीति वापस लेने का किया फैसला
नई दिल्ली। खुद को चौतरफा घिरता देखकर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने नई आबकारी नीति वापस लेने का फैसला किया है। लेफ्टिनेंट गवर्नर LG विनय कुमार सक्सेना ने इस नीति की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। केजरीवाल सरकार अब पुरानी आबकारी नीति ही चलाने का फैसला किया है। 6 महीने में नई नीति लाई जाएगी। इस नीति को पिछले साल दिल्ली में लागू किया गया था। जिसके तहत शराब के ठेकों की संख्या और कीमतों में कई बदलाव किए गए थे। बता दें कि आबकारी विभाग डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के पास है। अभी ये नहीं पता है कि सीबीआई जांच होगी या नहीं।
एलजी ने इस मामले में एक जांच रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई जांच कराने का आदेश दिया था। उनको मिली जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि नई आबकारी नीति में तमाम गड़बड़ियां हैं। सीबीआई जांच के लिए सक्सेना ने जिस रिपोर्ट को आधार बनाया था, उसमें कहा गया था कि दिल्ली आबकारी एक्ट और दिल्ली आबकारी नियमों का उल्लंघन किया गा है। नई आबकारी नीति में शराब बेचने वालों की लाइसेंस फीस भी माफ कर दी गई थी। इससे सरकार को 144 करोड़ रुपए का भी नुकसान हुआ। रिपोर्ट में मनीष सिसोदिया पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने वैधानिक प्रावधान और आबकारी एक्ट और रूल्स का उल्लंघन किया।
विपक्षी बीजेपी और कांग्रेस ने नई आबकारी नीति के मामले में केजरीवाल सरकार को घेर लिया था। दोनों पार्टियों ने आरोप लगाया था कि नई नीति के तहत दिल्ली में हर तरफ शराब की दुकानें खुल गई हैं। ये आरोप भी केजरीवाल सरकार पर लग रहा था कि भ्रष्टाचार किया गया है। छोटे शराब विक्रेता घाटे की वजह से दुकानें बंद कर चुके हैं क्योंकि बड़े दुकानदार ग्राहकों को बड़ी छूट दे रहे हैं। केजरीवाल सरकार ने जिस नई आबकारी नीति को वापस लिया, उसमें दिल्ली को 32 जोन में बांटा गया था और बाजार में सिर्फ 16 शराब विक्रेताओं को मंजूरी देने की बात थी। इससे एकाधिकार को बढ़ावा मिलने का आरोप भी लग रहा था।
