April 21, 2026

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AMU का ऐतिहासिक फैसला, इस्लामी शिक्षा विभाग में सनातन धर्म भी पढ़ाया जाएगा

अलीगढ़। यूपी की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को इस्लामी स्टडीज का बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां देश-विदेश के छात्र पढ़ने आते हैं। अब एएमयू ने एक ऐतिहासिक फैसला किया है। यूनिवर्सिटी के इस्लामी शिक्षा विभाग में अब सनातन धर्म की भी शिक्षा दी जाएगी। सनातन धर्म की शिक्षा पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर फिलहाल होगी। इस्लामी शिक्षा विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर मोहम्मद इस्माइल ने इस कोर्स को शुरू करने के लिए एएमयू के वाइस चांसलर को चिट्ठी लिखी है। कोर्स का नाम कंपेरिटिव रिलिजन होगा। एएमयू के पीआरओ उमर पीरजादा ने मीडिया को बताया कि यूनिवर्सिटी के थियोलॉजी यानी धर्मशास्त्र विभाग में पहले से ही सभी धर्मों के बारे में पढ़ाया जाता है। पहली बार इस्लामी शिक्षा विभाग सनातन धर्म के बारे में पढ़ाएगा।

पीरजादा ने कहा कि यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद खान भी चाहते थे कि यहां हर धर्म के छात्र पढ़ें। इस कोर्स को इसलिए शुरू किया जा रहा है, ताकि हिंदू और मुस्लिमों की एकता बनी रहे। हिंदूवादी संगठनों ने एएमयू के इस फैसले का स्वागत किया है। एक संगठन के नेता सौरव चौधरी ने हिंदी अखबार ‘नवभारत टाइम्स’ से कहा कि इससे सभी धर्मों के छात्रों के एक सूत्र में बांधने में मदद मिलेगी और दूसरे धर्म के लोगों को भी सनातन धर्म के बारे में पता चल सकेगा।

हालांकि, कुछ इस्लामी स्कॉलर इस फैसले का विरोध भी कर रहे हैं। एएमयू के धर्मशास्त्र विभाग के पूर्व चैयरमैन प्रोफेसर मुफ्ती जाहिद अली खान ने कहा कि अगर सनातन धर्म के बारे में पढ़ाना है, तो उसके लिए अलग विभाग होना चाहिए। जाहिद अली खान ने कहा कि धर्मशास्त्र विभाग में भी सभी धर्मों के बारे में पढ़ाना ठीक है, लेकिन इस्लामी शिक्षा विभाग में इस पढ़ाई से वहां अन्य धर्मों के बारे में पढ़ाने की मांग भी उठ सकती है। जिसका अच्छा असर नहीं पड़ेगा।

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