आर्टिकल 370 हटाने के बाद मोदी सरकार का एक और बड़ा फैसला, कश्मीर में अब बाहरियों को भी मिला वोटिंग का अधिकार, बौखलाई महबूबा
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में रह रहे लोगों के लिए आज बड़ी खबर सामने आई। दरअसल, जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) हिरदेश कुमार ने एक बड़े फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि अब कश्मीर से बाहर के लोगों को भी मतदान का अधिकार दिया जाएगा। इन बाहरी लोगों में कर्मचारी, छात्र, मजदूर या देश के दूसरे राज्यों के वो लोग शामिल होंगे जो कि पढ़ाई या काम के लिए आमतौर पर जम्मू-कश्मीर में रह रहे हैं। अब ये लोग भी मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवा कर जम्मू-कश्मीर में होने वाले चुनाव में अपने मत का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अब इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक नेताओं की तरफ से इस पर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अपने ट्वीट में अब्दुल्ला ने लिखा, ‘‘क्या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जम्मू कश्मीर के वास्तविक मतदाताओं के समर्थन को लेकर इतनी असुरक्षित है कि उसे सीटें जीतने के लिए अस्थायी मतदाताओं को आयात करने की जरूरत है? जब जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का मौका दिया जाएगा तो इनमें से कोई भी चीज भाजपा की सहायता नहीं करेगी।’’
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला के साथ ही मामले पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी अपना पक्ष रखते हुए इसे स्थानीय लोगों को शक्तिहीन करने वाला फैसला बताया। मुफ्ती ने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर में चुनावों को स्थगित करने संबंधी भारत सरकार का निर्णय, पहले भाजपा के पक्ष में पलड़ा झुकाने और अब गैर स्थानीय लोगों को वोट देने की अनुमति देने से चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए है। असली उद्देश्य स्थानीय लोगों को शक्तिहीन करने के लिए जम्मू-कश्मीर पर शासन जारी रखना है।’’
अब माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लोग नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला के साथ ही मामले पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की जमकर क्लास लगा रहे हैं। लोग जम्मू-कश्मीर की हालत के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
