February 16, 2026

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भाजपा से गठबंधन तोड़ना JDU को पड़ रहा है भारी, अब यहां पूरी इकाई हो गयी भाजपा में शामिल

नई दिल्ली। यह संयोग है या प्रयोग? इस प्रश्न का उत्तर तो फिलवक्त भविष्य के गर्भ में समाहित है, किंतु वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य के दृष्टिगत जेडीयू के लिए कटु सत्य यह है कि जिस तीव्रता के साथ उसके विधायक बीजेपी के खेमे में शामिल हे रहे हैं, उससे जेडीयू में खलबली मची हुई है। जेडीयू के कर्णधारों की इस वजह से अनवरत निंद्रा बाधित हो रही है। ऐसी स्थिति में खुद को विकल्प विहिन महसूस कर रही जेडीयू इस परस्थिति से कुंठित होकर बीजेपी पर पार्टी तोड़ने के आक्षेप लगा रही है, लेकिन इस आक्षेप में कितनी सत्यता है, यह विवेचना का विषय है। उधर, राजनीतिक गलियारों में जेडीयू द्वारा लगाए जा रहे इन आक्षेपों के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

जानें पूरी वस्तुस्थिति ?

दरअसल, मणिपुर, अरूणाचल प्रदेश के बाद अब जेडीयू के लिए दादर नगर हवेली से बेहद हदयविदारक खबर आई है। खबर है कि दादर नगर हवेवी में जेडीयू की पूरी इकाई ही बीजेपी में ही शामिल हो गई। निसंहेद यह स्थिति जेडीयू के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। उधर, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में दादर नगर हवेली में पूरी जेडीयू इकाई ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। विदित हो कि इससे पूर्व अरूणाचल प्रदेश और मणिपुर में भी जेडीयू विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। बीजेपी के महासचिव तरुण चघु के मुताबिक, जेडीयू के 16 विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। खबरों की मानें तो दादर नगर हवेली में जेडीयू की पूरी इकाई में 16 विधायक ही थे। इससे पूर्व अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू के 8 विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। उधर, उक्त प्रकरण पर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने पीएम मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्य़क्ष जेपी नड्डा पर पार्टी को तोड़ने का आरोप लगाया है। वहीं, बीजेपी ने जेडीयू के इन आक्षेपों को निर्मूल बताते हुए कहा कि किसी विधायक को बाध्य नहीं किया गया, अपितु वह स्वत: अपनी इच्छा से हमारे साथ आए हैं। बहरहाल, उक्त राजनीतिक द्वंद में आतंरिक सत्यता जो भी हो, किंतु इसे लेकर वाद-विवाद का सिलसिला जारी है।

बिहार का राजनीतिक रार 

विदित हो कि विगत दिनों बिहार में राजनीतिक रार के उपरांत नीतीश कुमार ने बीजेपी से अपनी राहें अलहदा करने के उपरांत राजद के साथ हाथ मिला लिया था। नीतीश कुमार दोबारा प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें थे और तेजस्वी यादव दूसरी बार डिप्टी सीएम। जिसके बाद से देखा जा रहा है कि जेडीयू में टूट का सिलसिला जारी है।

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