June 4, 2026

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‘बिहार में लगाया जाए राष्ट्रपति शासन’, जहरीली शराब कांड की संसद में गूंज, राज्य का दौरा करेगी NHRC की टीम

नई दिल्ली। बिहार में जहरीली शराब से मौत के मामले थमने का नाम नहीं ले रही है। बिहार का यह मुद्दा अब देश भर में चर्चा का विषय बन चुका है। संसद में इसको लेकर हंगामा शुरू हो चुका है। बिहार के छपरा जिले में जहरीली शराब पीने से 70 से ज्यादा लोगों की मौत का मामला मंगलवार को एक बार फिर से संसद में गूंजा। इस मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम छपरा का दौरा करने जा रही है, जिसे लेकर बवाल शुरू हो गया। राज्यसभा में कांग्रेस की लीडरशिप में विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को उठाया और वॉकआउट कर गए। कांग्रेस के अलावा बिहार की सत्ताधारी पार्टी आरजेडी, जेडीयू ने इस मुद्दे पर बवाल काटा।

इतना ही नहीं बल्कि आपको बता दें किस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस ने भी एकजुटता दिखाई। इन सभी दलों ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह मानवाधिकार आयोग का गलत इस्तेमाल कर रही है। शून्यकाल में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। वहीं लोकसभा में भी यह मुद्दा उठा और भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद के अलावा लोजपा (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने भी इस पर चर्चा की मांग की। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एनएचआरसी को छपरा का दौरा करना चाहिए और हालात का को देखने जाना चाहिए।

इसके अलावा बिहार की राजनीति में एक बड़ा नाम रहे रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान भी इस मुद्दे को लेकर एक्टिव दिखाई दे रहे हैं। चिराग पासवान ने तो बिहार में राष्ट्रपति शासन की मांग कर डाली और जहरीली शराब कांड की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। विपक्ष के सदन से वॉकआउट के बाद आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि भाजपा सरकार एनएचआरसी का राजनीतिक उपकरण के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में भी हर तीन महीने में जहरीली शराब से लोगों के मरने का मामला सामने आता है। लेकिन वहां का दौरा एनएचआरसी ने कभी नहीं किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या मानवाधिकार आयोग ने कभी मोरबी का दौरा किया है या फिर यूपी के अलीगढ़ एवं मध्य प्रदेश और हरियाणा का दौर किया है? इस तरह के पक्षपात के विरोध में ही विपक्ष के दलों ने सदन से वॉकआउट करने का रास्ता चुना है।

गौरतलब है कि बिहार में जहरीली शराब पीने के बाद हुई मौत के मामले में टीएमसी की सांसद डोला सेन ने भी शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह दुख की बात है कि एनएचआरसी की टीम गुजरात या यूपी नहीं जाती है, लेकिन उसके पास बिहार और बंगाल जाने के लिए समय है। डीजीपी बोले- इस साल सस्पेंड हो चुके 206 पुलिस वाले इस बीच बिहार सरकार ने जहरीली शराब कांड को लेकर ऐक्शन तेज कर दिया है। 5 पुलिसवालों को इस मामले में सस्पेंड किया गया है। इसके साथ ही अब तक 206 पुलिसकर्मी ऐसे हैं, जो इस साल अवैध शराब कारोबार के मामलों में निलंबित किए जा चुके हैं। बिहार के डीजीपी एसके सिंघल ने कहा कि हम लगातार दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ ऐक्शन ले रहगे हैं। 2020 में बिहार में 201 पुलिसकर्मी हटाए गए थे। इसके बाद 2021 में भी 172 के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।

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