July 16, 2026

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जैन समाज की नाराजगी से सम्मेद शिखर जी मामले में हेमंत सोरेन सरकार बैकफुट पर!

रांची। जैन धर्म को मानने वालों के जमकर विरोध प्रदर्शन की वजह से झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार अब पारसनाथ के सम्मेद शिखर जी के मामले में बैकफुट पर आती दिख रही है। हेमंत सोरेन की सरकार ने सम्मेद शिखर जी को पर्यटन स्थल घोषित किया था। जिसके खिलाफ जैन समाज ने जमकर विरोध किया है। अब सोरेन सरकार का कहना है कि वो किसी धर्म के खिलाफ नहीं है और किसी की आस्था को ठेस भी नहीं पहुंचाना चाहती। हेमंत सोरेन सरकार में परिवहन मंत्री चंपई सोरेन ने बुधवार को ये बात कही। चंपई सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार सम्मेद शिखर जी के मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है।

हेमंत सोरेन के मंत्री चंपई सोरेन ने मीडिया से ये भी कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सभी धर्मों का सम्मान करता है। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि विवाद किसने खड़ा किया, ये सभी जानते हैं। जैन समाज इसलिए आक्रोशित है, क्योंकि सम्मेद शिखर जी से 24 तीर्थंकरों में से 20 का जीवन जुड़ा हुआ है। यहां देश और दुनिया से जैन समाज के लोग दर्शन करने आते हैं। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने सम्मेद शिखर जी को पर्यटन स्थल घोषित कर दिया था। जैन समाज का कहना है कि ये पर्यटन स्थल नहीं, उनका पावन स्थल घोषित होना चाहिए।

इस मामले में सियासत भी तेज हो रही है। झारखंड के गिरिडीह से सांसद सीपी चौधरी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि सम्मेद शिखर जी को धार्मिक स्थल घोषित किया जाए। चौधरी ने इस इलाके में 5 किलोमीटर तक शराब, मांस वगैरा की बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी की है। साथ ही सम्मेद शिखर जी को धार्मिक के साथ आध्यात्मिक केंद्र बनाने की मांग भी चिट्ठी में लिखी है। वहीं, राज्यसभा के पूर्व सांसद महेश पोद्दार ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर सम्मेद शिखर जी को धार्मिक तीर्थस्थल घोषित करने की मांग की है। इन सबके बाद और जैन समाज के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद सोरेन सरकार अब बैकफुट पर आती दिख रही है।

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