May 2, 2026

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कर्नाटक में फिर गरमा सकता है हिजाब विवाद, जानिए क्या है वजह

नई दिल्ली। कर्नाटक में एक बार फिर हिजाब का विवाद गहराने के आसार दिख रहे हैं। ऐसा सुप्रीम कोर्ट में बेंच न बनने के कारण हो सकता है। दरअसल, कुछ छात्राओं ने स्कूल-कॉलेजों में हिजाब को मंजूरी न मिलने के कारण सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी। इस पर पहले दो जजों की बेंच ने सुनवाई की थी। दोनों जजों की राय अलग थी। ऐसे में विवाद जस का तस है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने विवाद के निपटारे के लिए बड़ी बेंच को मसला भेजा था, लेकिन ये बेंच अब तक नहीं बन सकी है। चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को छात्राओं के वकील की तरफ से अर्जी दिए जाने पर कहा कि आप देर से आए हैं। अब होली की छुट्टी के बाद बेंच बनाएंगे। वहीं, छात्राओं के वकील का कहना था कि परीक्षा 5 दिन बाद शुरू हो रही है और सुप्रीम कोर्ट में 12 मार्च तक होली की छुट्टी है। ऐसे में छात्राएं कैसे इम्तिहान देंगी।

इस बीच, कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि परीक्षा में हिजाब को मंजूर नहीं किया जाएगा। नागेश ने कहा कि हिजाब यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं है। कर्नाटक में 9 मार्च से 12वीं की परीक्षा है। ऐसे में अब हिजाब पर जोर दे रही छात्राएं फिर से आंदोलन कर सकती हैं। छात्राओं का कहना है कि वे बिना हिजाब के स्कूल और कॉलेज नहीं जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देने वाली छात्राएं पढ़ाई करने जा भी नहीं रही हैं। अगर ऐसा हुआ, तो निश्चित तौर पर मसला एक बार फिर गरमाएगा और इससे सियासत भी खूब देखने को मिल सकती है।

हिजाब का विवाद पिछले साल का है। ये विवाद कर्नाटक के उडुपी जिले के एक कॉलेज से शुरू हुआ था। सरकारी कॉलेज ने अपने यहां हिजाब पहनने पर रोक लगा दी थी। जिसके खिलाफ छात्राओं का समूह कर्नाटक हाईकोर्ट भी गया था। वहां से उनको राहत नहीं मिली थी। जिसके बाद इन छात्राओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस मामले में असदुद्दीन ओवैसी समेत कई मुस्लिम नेता भी कूदे थे। इन नेताओं ने हिजाब न पहनने देने को लड़कियों की शिक्षा में अड़ंगा करार दिया था। वहीं, कर्नाटक की बीजेपी सरकार ने साफ कर दिया था कि किसी सूरत में नियम में छूट नहीं दी जा सकती।

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