May 1, 2026

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टीपू सुलतान से लेकर हिजाब तक कर्नाटक चुनाव के ये हैं मुद्दे, जानिए वीआईपी सीटें कौन सी और किनका वोट अहम

बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीख का एलान हो गया है। 10 मई को कर्नाटक में वोट डाले जाएंगे और 13 मई को नतीजे आएंगे। इन सबके बीच यहां तमाम मुद्दे सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस के बीच चुनावी जंग में चलने जा रहे हैं। बीजेपी डबल इंजन की सरकार और विकास के नाम पर वोट मांग रही है, लेकिन बीजेपी की बसवराज बोम्मई सरकार के कुछ कदमों से कांग्रेस इसे एक खास धर्म को प्रभावित करने का आरोप लगा रही है। कांग्रेस जिन मुद्दों पर बीजेपी के खिलाफ मैदान में उतरने की तैयारी में है, उनमें टीपू सुलतान के खिलाफ बयान, मुस्लिमों का 4 फीसदी आरक्षण खत्म कर उसे 2-2 फीसदी में लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों में बांटने, हिजाब विवाद, मस्जिदों में लाउडस्पीकर हटाने का एलान और 40 फीसदी भ्रष्टाचार का आरोप है।

बीजेपी की तरफ से माहौल बनाने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री और पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह अब तक 9 बार कर्नाटक का दौरा कर चुके हैं। अमित शाह ने बुधवार को एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में दावा किया कि बीजेपी एक बार फिर बड़े बहुमत से कर्नाटक में सरकार बनाएगी। हालांकि, एक अन्य न्यूज चैनल के ओपिनियन पोल में बताया गया कि इस बार कर्नाटक में कांग्रेस को बहुमत मिलने जा रहा है। जेडीएस को भी इस ओपिनियन पोल में 30 से ज्यादा सीटें दी गई हैं। अब ये 13 मई को ही पता चलेगा कि बीजेपी फिर कर्नाटक में सरकार बनाती है, या इस बार कांग्रेस बाजी मारती है। कर्नाटक में 1985 के बाद से किसी भी पार्टी ने लगातार दूसरी बार सरकार नहीं बनाई है।

कर्नाटक में वीआईपी सीटों की बात करें, तो सीएम बसवराज बोम्मई शिगांव से चुनाव लड़ते रहे हैं। पूर्व सीएम और कांग्रेस के नेता सिद्धारामैया वरुणा और कोलार सीट से प्रत्याशी हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार कनकपुरा सीट से मैदान में हैं। पूर्व सीएम और जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी चनपट्टना से चुनाव लड़ते हैं। शिकारीपुरा से पूर्व सीएम और बीजेपी के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा चुनाव लड़ते रहे हैं। इस बार सबकी नजर है कि येदियुरप्पा चुनाव लड़ते हैं या नहीं। वहीं, हुबली से जगदीश शेट्टार, चितपुर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक और बेल्लारी सीट भी वीआईपी है। कर्नाटक मे 84 फीसदी हिंदू और 12 फीसदी मुस्लिम हैं। जबकि, 1.87 फीसदी ईसाई जनसंख्या है। वोटों पर लिंगायत और वोक्कालिगा का सबसे ज्यादा असर पड़ता है। लिंगायत वोटरों की तादाद 14 और वोक्कालिगा की तादाद 11 फीसदी है। वहीं, कर्नाटक में एससी और एसटी वोटर भी 24 फीसदी हैं।

 

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