April 18, 2026

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कौन हैं कर्नाटक जीत में कांग्रेस के हीरो बने डी के शिवकुमार ? अरबों की संपत्ति, भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं दर्ज

नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 के परिणाम सामने आने के साथ ही कांग्रेस पार्टी के भीतर खुशी की लहर दौड़ गई है। लेकिन इस जीत के हीरो रहे कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डी के शिवकुमार। कांग्रेस भी राज्य में जीत का श्रेय उन्हें ही दे रही है। ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि आखिर डी के शिवकुमार हैं कौन, तो इस खबर में हम आपको इसी की जानकारी देने जा रहे हैं। दरअसल, डी के शिवकुमार वर्तमान समय में कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर काबिज हैं। खास बात ये है कि डी के शिवकुमार को गांधी परिवार का शुरुआत से करीबी बताया जाता है। लिहाजा कांग्रेस ने उन्हें कर्नाटक में अध्यक्ष पद सौंपा था। वे उसपर खरे भी उतरे हैं। 5 साल के बाद भाजपा बड़े उलटफेर का शिकार हो गई है। अब वे कांग्रेस के लिए सीएम के दावेदार भी हैं। हालांकि चुनावी गलियों में इस बात की सरगर्मी है कि कांग्रेस के ही सिद्धारमैया और उनके बीच सीएम पद की कुर्सी को लेकर सियासी खींचतान मच सकती है। बात करें अगर उनके निजी जीवन की तो वे एक राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं।

कांग्रेस के लिए संकटमोचक बने डी के शिवकुमार हर बात की तरह इस बार भी अपनी परंपरागत सीट कनकपुरा चुनाव अखाड़े में उतरे थे। परंपरागत सीट इसलिए की वे यहां से अब तक 8 बार विधायक चुने जा चुके है। कनकपुरा में उनका मुकाबला बीजेपी सरकार में राजस्व मंत्री रहे आर अशोक से था। जिन्हें उन्होंने हरा दिया है। इस सीट पर सभी की निगाहें लगी हुईं थी। बता दें कि कांग्रेस इस बार कर्नाटक में 22 वर्षों के बाद सत्ता में आएगी। जल्द ही अब कांग्रेस अपने विधायकों के साथ राज्यपाल के पास पहुंच सरकार बनाने का दावा करेगी।

कर्नाटक कांग्रेस के सबसे अमीर नेता, भ्रष्टाचार के आरोप

डीके के शिवकुमार के बारे में कहा जाता है कि वो कर्नाटक के सबसे अमीर नेता हैं। कर्नाटक के भीतर शिवकुमार को भारी समर्थन भी हासिल है। इसी की बानगी हमें आज के परिणामों में नजर आ रही है। उनके समर्थक और चाहने वाले उन्हें मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठे हुए देखना चाहते हैं। उनके बारे में ये भी कहा जाता है कि वे 840 करोड़ रुपये से अधिक के मालिक हैं। कांग्रेस पार्टी को जब भी फंड्स की जरूरत पड़ती है तो शिवकुमार वहां खड़े रहते हैं यानी वे पार्टी के लिए एक तरीके से संकटमोचक की भूमिका निभाते आ रहे हैं। लेकिन इस सब बातों के बावजूद भी वो सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के चंगुल में भी फंसे हुए हैं। 104 दिन जेल रहकर आए हैं। अब देखना होगा कि वो राज्य में बड़ी जीत के बाद कांग्रेस के लिए क्या भूमिका निभाएंगे ?

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