May 1, 2026

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‘मुझपर राम जन्मभूमि केस में फैसला न सुनाने का दबाव था’, जस्टिस सुधीर अग्रवाल का बड़ा खुलासा

मेरठ। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट की जिस बेंच ने फैसला सुनाया था, उसमें जस्टिस सुधीर अग्रवाल भी थे। अब रिटायर हो चुके जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने शुक्रवार को एक सनसनीखेज और बड़ा खुलासा किया। जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने मेरठ कॉलेज में एक कार्यक्रम में बताया कि उन पर राम जन्मभूमि मामले में फैसला न सुनाने का बहुत दबाव था। जस्टिस अग्रवाल ने ये भी कहा कि अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच फैसला न सुनाती, तो राम जन्मभूमि का मसला और 200 साल तक कोर्ट में चलता रहता। जस्टिस सुधीर अग्रवाल बीती 14 मई को राम जन्मभूमि भी दर्शन के लिए गए थे।

जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने बताया कि जब वो राम जन्मभूमि के मसले पर फैसला सुनाने आए, तो उनको कोई तनाव नहीं था। उन्होंने कहा कि फैसला आने से पहले कुछ लोगों को पुलिस ने पकड़ा था। उन लोगों ने बताया था कि राम जन्मभूमि मामले में फैसला सुनाने वाले जजों को मार डालना है। ये जानकारी मिलने पर जस्टिस अग्रवाल के परिवार में तनाव हो गया था। जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस ने उनसे कहा कि कोई आपत्ति न हो, तो बेंच में आपको भी रखना चाहते हैं। इस पर जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने उनसे कहा था कि अगर मुझे बेंच में रखा गया, तो इस केस का फैसला करूंगा। बता दें कि जस्टिस अग्रवाल ने राम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुनाया था।

जस्टिस सुधीर अग्रवाल के मुताबिक राम जन्मभूमि के फैसले की वजह से ही उनकी काफी पहचान बनी। उन्होंने कहा कि फैसले के बाद वो गुजरात, पूर्वोत्तर, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत गए। चेन्नई में लोगों ने उनके साथ फोटो लिए और पैर छुए। जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि इसी से पता चलता है कि भगवान राम सभी लोगों के जीवन में कितना महत्व रखते हैं। जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने कहा कि जज रहते उन्होंने 1.40 लाख से ज्यादा केस में फैसले सुनाए और कभी दबाव में नहीं रहे।

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