May 18, 2026

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पूरे देश में UCC लागू होना चाहिए’, समान नागरिक संहिता पर बोले CM पुष्कर धामी

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के भोपाल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर दो टूक जवाब दिया था। पीएम मोदी ने विपक्षी दलों की क्लास लगाते हुए कहा था कि समान नागरिक संहिता को लेकर लोगों को भड़काने का काम किया जा रहा है। कुछ लोग इस पर तुष्टिकरण की सियासत कर रहे है। पीएम मोदी के यूसीसी पर दिए गए बयान के बाद देश में सियासत भी तेज हो गई है।

पीएम मोदी ने यूनिफॉर्म सिविल कोर्ड का मुद्दा छेड़ा तो इससे कुछ दलों को  मिर्ची लगनी शुरू हो गई। विपक्ष दलों की तरफ से लगातार उनके इस बयान पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही है और पीएम मोदी पर लगातार निशाना साधा जा रहा है। इसी बीच अब यूसीसी को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान सामने आया हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, यूसीसी पूरे देश में लागू होना चाहिए। यूसीसी कमेटी के फैसले सबके हित में होंगे। लंबे समय से समान कानून की मांग की जा रही है।

सीएम धामी ने कहा, यूनिफॉर्म सिविल कोर्ड भारत के संविधान की मूल भावना है। भारत के संविधान में जो प्रावधान है धारा 44 में, उसके अंतर्गत ही सारे काम होने है। उन पर निर्णय होने है। हमारी ड्राफ्ट बनाने वाली कमेटी है यूसीसी कमेटी उस पर काम कर रही है और वो सबके हित में आएगा। एक देश में सबके लिए एक समान कानून होना चाहिए। इसकी मांग लंबे समय से उठती रही है। हमने उत्तराखंड में इसकी शुरुआत की है। देवभूमि इसके लिए अगुवाई कर रही है। हमारी अपेक्षा है कि पूरे देश में यह कानून लागू होना चाहिए।

UCC पर PM मोदी का दो टूक बयान-

भोपाल में पीएम मोदी ने मेरा बूथ, सबसे मजबूत कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यूसीसी पर बड़ा बयान दिया था। पीएम मोदी ने कहा, भारत के मुसलमान भाई बहनों को भी ये समझना होगा कि कौन से राजनीतिक दल उनको भड़का करके उनका राजनीतिक फायदा ले रहे हैं। उनको बर्बाद कर रहे है। आजकल हम देख रहे है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड पर ऐसे लोगों को भड़काने का काम हो रहा है।

पीएम मोदी ने आगे कहा, एक घर में परिवार के एक सदस्य के लिए एक कानून हो और परिवार के दूसरे सदस्य के लिए दूसरा कानून हो तो वो घर चल पायेगा क्या? तो फिर ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा? हमें याद रखना है कि भारत के संविधान में भी नागरिकों के समान अधिकार की बात कही गई है।

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