No Confidence Motion: मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव गिरा
नई दिल्ली। एक बार फिर से विपक्ष का दांव पीएम मोदी पर उल्टा साबित हो गया। दरअसल, विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव सदन से संख्याबल के अभाव में खारिज कर दिया गया है। विपक्ष ना महज संख्याबल के लिहाज से कमजोर साबित हुआ, बल्कि अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में उसके द्वारा सदन में पेश किए गए तर्कों को भी मोदी सरकार खोखले साबित करने में सफल साबित हुई। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष के इस अविश्वास को उसकी हताशा करार दिया। हालांकि, इससे पहले 2018 में भी विपक्ष मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी, तब भी संख्याबल के अभाव में वो पारित नहीं हो पाया था। आज प्रधानमंत्री ने तंज कसते हुए कहा था कि विपक्ष साल 2028 में भी अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएगी।
वहीं, सदन में बदजुबानी करने के आरोप में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के प्रस्ताव पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शेष सत्र के लिए सदन से निलंबित कर दिया है। दरअसल, अधीर ने मणिपुर मुद्दे को लेकर पीएम मोदी की तुलना धृतराष्ट्र से की थी। इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में पीएम मोदी ने अधीर पर तंज कसते हुए कहा था कि ये कांग्रेस ने अधीर की क्या हालत कर दी।
मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है। विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में अपनी तर्कें नहीं रख पाईं जिसका नतीजा यह हुआ कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सर्वसम्मति से इसे खारिज कर दिया, जिसे अब राजनीतिक गलियारों में विपक्ष के लिए आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व बड़ा झटका माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने सदन में कहा कि, ”’मणिपुर में तब किसकी सरकार थी जब सब कुछ उग्रवादी संगठनों की इच्छा के मुताबिक होता था? मणिपुर में तब किसकी सरकार थी जब सरकारी दफ्तरों में महात्मा गांधी की तस्वीर लगाने की इजाजत नहीं थी, जब मणिपुर में सरकारी दफ्तरों में महात्मा गांधी की तस्वीर लगाने की इजाजत नहीं थी तो किसकी सरकार थी? स्कूलों में राष्ट्रगान की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया गया?…उनका (विपक्ष का) दर्द चयनात्मक है। वे राजनीति से परे नहीं सोच सकते…”
वहीं, प्रधानमंत्री ने आगे अपने संबोधन में नॉर्थ ईस्ट को लेकर विपक्ष को आईना दिखाया। पीएम मोदी ने कहा कि, ‘”…5 मार्च 1966 को कांग्रेस ने अपनी वायु सेना से मिजोरम में असहाय नागरिकों पर हमला करवाया था। कांग्रेस को जवाब देना चाहिए कि क्या वह किसी अन्य देश की वायु सेना थी। क्या मिजोरम के लोग मेरे देश के नागरिक नहीं थे? क्या उनकी सुरक्षा भारत सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है?…”
पीएम मोदी ने मणिपुर मुद्दे पर सदन में पहली बार अपना बयान दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि, ‘मणिपुर पर चर्चा करने का विपक्ष का कोई इरादा नहीं है। मणिपुर की स्थिति पर अमित शाह ने सबकुछ बताया। मणिपुर में अदालत का एक फैसला आया है और उसके पक्ष और विपक्ष में जो स्थितियां बनी हैं, उससे स्थिति हिंसात्मक हो गई। महिलाओं के साथ जो गंभीर अपराध हुआ, वो अक्षम्य है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही है और मैं देश के सभी नागरिकों को आश्वस्त करनता हूं कि जिस तरह प्रयास हो रहे हैं, उसे देखते हुए शांति का सूरज जरूर उगेगा वहां। प्रधानमंत्री ने आगे अपने बयान में कहा कि, ‘ मैं मणिपुर के लोगों से भी आग्रहपूर्वक कहना चाहता हूं। मैं वहां की माताओं बेटी से कहना चाहता हूं, देश आपके साथ है। ये सदन आपके साथ है। हम सब मिल करके के इस चुनौती का समाधान निका्लेंगे। मैं मणिपुर के लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि मणिपुर फिर विकास की राह पर तेज गति से आगे बढ़ेगा।
