February 16, 2026

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अब उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को निकालेगी ये खास टीम, जानिए क्यों इन्हें कहा जाता है ‘रैट माइनर्स’?

उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में एक तरफ ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग हो रही है। वहीं, यहां पिछले 16 दिन से फंसे 41 मजदूरों को निकालने के लिए अब 6 लोगों की टोली हाथ से खोदाई कर मलबे को हटाएगी। मौके पर मौजूद मीडिया ने खोदाई करने वाले इन लोगों से बात की। टीम को ‘रैट माइनर्स’ कहा जाता है। क्योंकि ये लोग छोटी सी जगह में घुसकर मलबे को उसी तरह खोदकर निकालेंगे, जैसे चूहे अपना बिल बनाने के लिए करते हैं। मीडिया को इन लोगों ने बताया कि ऑगर मशीन के जरिए जो संकरा रास्ता बनाया गया है, उससे होकर वे मलबे को छोटे फावड़े से खोदेंगे और एक बार में छोटी ट्रॉली से करीब 7 किलो मलबा बाहर निकालेंगे। जहां ऑगर मशीन चलाकर मलबा काटा गया था, वहां से मजदूर करीब 15 मीटर दूर हैं। हाथ से मलबा काटने में वक्त लगेगा, लेकिन मजदूरों को सकुशल सिलक्यारा सुरंग से निकालने के लिए ये तरीका भी अपनाया जा रहा है।

इससे पहले अमेरिका में बनी ऑगर मशीन ने करीब 45 मीटर तक मलबा हटाया था। इसके बाद स्टील के सरिया में उलझकर ऑगर मशीन का कटर वहीं टूटकर रह गया था। हैदराबाद से प्लाज्मा कटर मशीन मंगाकर ऑगर मशीन के उस टूटे हिस्से को बड़ी मशक्कत से काटकर निकाला गया और अब उसी जगह से 6 मजदूरों का दल आगे का मलबा हटाने के काम में जुट रहा है। वहीं, सुरंग के ऊपर से जिस मशीन से वर्टिकल ड्रिलिंग की जा रही है, उसने आज सुबह तक करीब 30 मीटर खोदाई कर ली थी। वर्टिकल ड्रिलिंग से मजदूरों तक पहुंचने के लिए करीब 86 मीटर तक डेढ़ फिट व्यास का हिस्सा काटना है। दूसरी तरफ बड़कोट के रास्ते भी सुरंग तक पहुंचने के लिए विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तीन बार विस्फोटक लगाकर काफी चट्टानों को हटाया जा चुका है। हालांकि, इस रास्ते से मजदूर काफी दूर मिलेंगे। उनके बीच दूरी 400 मीटर से भी ज्यादा की है।

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में ऑल वेदर रोड बन रही है। इसी सड़क पर सिलक्यारा से बड़कोट तक सुरंग खोदने का काम जारी था। 12 नवंबर को तड़के करीब 5.30 बजे जब 41 मजदूर काम कर रहे थे, तो अचानक सिलक्यारा सुरंग में धंसाव हो गया। इस धंसाव से 60 मीटर तक मलबा इस सुरंग में भर गया और सभी मजदूर उसके पीछे फंस गए। बड़ी मुश्किल से मजदूरों तक भोजन, दवा और अन्य जरूरी चीजें पहुंचाई जा रही हैं। उनके लिए सुरंग में लैंडलाइन फोन की व्यवस्था भी की गई है। ताकि वे घरवालों से बात कर सकें। वहीं, सेना, एनडीआरएफ, विदेशी बचावकर्मी समेत कई एजेंसियां मजदूरों को बचाने के काम में जुटी हैं।

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