February 16, 2026

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NCPCR : ‘कर्नाटक वक्फ बोर्ड बिना लाइसेंस यतीमखाना चलाने में शामिल’, कर्नाटक के सीएम को बाल आयोग के अध्यक्ष ने घेरा

नई दिल्ली। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने बेंगलुरु के यतीमखाने के संबंध में गंभीर आरोप लगाए हैं। बीते दिनों प्रियंक कानूनगो ने इस मदरसे का निरीक्षण किया था। प्रियंक कानूनगो ने आरोप लगाया है कि इस यतीमखाने में जिन 200 बच्चों को रखे जाने की बात कही जा रही है, वे किसके हैं इसका पता नहीं। साथ ही कहां से ये बच्चे आए और कौन इनको लाया इसका भी पता आयोग को नहीं चला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बगैर लाइसेंस के बेंगलुरु का दारुल उलूम सैयदिया यतीमखाना चलाया जा रहा है और इसे ऐसे चलने देने में कर्नाटक के वक्फ बोर्ड का हाथ है। एनसीपीसीआर अध्यक्ष ने ये आरोप भी लगाया है कि इस यतीमखाने में भ्रष्टाचार का आरोप कर्नाटक के ही एक एक्टिविस्ट ने लगाया है। उनका ये भी कहना है कि दारुल उलूम सैयदिया यतीमखाने की संपत्ति भी 1500 करोड़ की बताई जा रही है। प्रियंक कानूनगो ने कर्नाटक के सीएम सिद्धारामैया को अपने एक्स पोस्ट पर टैग करते हुए इन सवालों के जवाब मांगे हैं।

प्रियंक कानूनगो के खिलाफ बीते दिनों इसी यतीमखाने में जाने के कारण बेंगलुरु के थाने में केस दर्ज किया गया है। प्रियंक कानूनगो ने आरोप लगाया था कि कर्नाटक की सरकार ने यतीमखाने की सच्चाई उजागर करने पर ये केस दर्ज किया है। बेंगलुरु के देवारा जीवनहल्ली इलाके में दारुल उलूम सैयदिया यतीमखाना है। यतीमखाने के ट्रस्टी अशरफ खान ने एनसीपीसीआर अध्यक्ष के बारे में पुलिस को शिकायत दी थी कि उन्होंने जबरन अतिक्रमण किया। कानूनगो ने आरोप लगाया था कि यतीमखाने के बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जाता है। वहीं, ट्रस्टी का कहना था कि जो भी आरोप एनसीपीसीआर अध्यक्ष लगा रहे हैं, वो गलत हैं। हालांकि, कर्नाटक सरकार के गृह विभाग ने इस यतीमखाने को चलाने के लिए जरूरी नियमों के बारे में जांच के आदेश भी दिए हैं।

प्रियंक कानूनगो ने कहा था कि यतीमखाने में 200 बच्चों को रखा गया है। 100 वर्गफिट के कमरे में 8 बच्चे रहते हैं। इस तरह 5 कमरों में 40 बच्चों को रखा जा रहा है। कॉरिडोर में भी 16 बच्चों को रखे जाने की बात उन्होंने कही थी। बाकी 150 बच्चों को मस्जिद के 2 हॉल में रात को सोने के लिए भेजे जाने का आरोप कानूनगो ने लगाया था। उन्होंने ये भी कहा था कि सभी बच्चे दिनभर इसी हॉल में चलने वाले मदरसे में दीनी तालिम ही हासिल करते हैं।

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