नए विवाद में घिर सकती है कर्नाटक की कांग्रेस सरकार
नियमों के खिलाफ जाकर दलित और ओबीसी मठों को जमीन देने का सिद्धारामैया सरकार ने किया है फैसला
बेंगलुरु। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार नए विवाद में घिरती दिख रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रमुख सरकारी विभागों की सख्त आपत्ति के बाद भी सिद्धारामैया की सरकार ने 22 दलित और ओबीसी मठों को 255 करोड़ रुपए कीमत की जमीन देने का फैसला किया है। सीएम सिद्धारामैया की कांग्रेस सरकार को कर्नाटक के वित्त और कानून विभाग ने सलाह दी थी कि निजी संस्थाओं को गोमाला और शहर की सीमा के भीतर की जमीन नहीं दी जानी चाहिए।
रिपोर्ट्स में दस्तावेजों के हवाले से बताया गया है कि वित्त और कानून विभाग के अफसरों ने कर्नाटक की सिद्धारामैया सरकार को चेताया था कि निजी संस्थाओं को जमीन देने की कानूनी जांच हो सकती है। कर्नाटक के सरकारी नियम कहते हैं कि गोमाला की जमीन निजी संस्थाओं को नहीं दी जा सकती। वहीं, 1969 के कर्नाटक भूमि अनुदान नियम में कहा गया है कि राज्य में शहरी सीमा के भीतर जो भी सरकारी जमीन है, उसका इस्तेमाल सिर्फ सार्वजनिक कार्यों के लिए ही किया जा सकता है। किसी निजी काम के लिए शहरी इलाकों की सरकारी जमीन नहीं दी जा सकती।
वित्त और कानून विभागों की आपत्ति को दरकिनार कर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने पिछले हफ्ते दलित और ओबीसी मठों को ऐसी जमीनें देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इन मठों ने बीते साल सरकार से जमीन की मांग की थी। जो जमीन दलित और ओबीसी मठों को दी जानी है, वो बेंगलुरु उत्तर के रावुत्तनहल्ली में है। करीब 52 एकड़ जमीन मठों को देने का फैसला सिद्धारामैया सरकार ने किया है। हर मठ को 20 गुंटा से 4 एकड़ तक जमीन देने का फैसला किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्नाटक के वित्त विभाग का कहना है कि इतनी जमीन का विकास करने पर प्रति एकड़ की कीमत 4.8 करोड़ रुपए हो सकती है। जबकि, राजस्व विभाग के अफसरों का कहना है कि कई मठ नए हैं और उनकी ओर से दूसरों की मदद का कोई रिकॉर्ड तक नहीं है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश है कि सार्वजनिक इस्तेमाल की जमीन को बचाकर रखना है।
