कर्नाटक विधानसभा में अभिभाषण को लेकर सरकार और राज्यपाल के बीच छिड़ी रार
नई दिल्ली। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और राज्यपाल थावरचंद गहलोत के बीच रार छिड़ गई है। प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल ने अपने अभिभाषण की सिर्फ दो लाइने पढ़ीं और इसके बाद वहां से चले गए। यह दो लाइनें भी उन्होंने हिंदी में पढ़ीं। दरअसल राज्य सरकार की ओर राज्यपाल को उनके अभिभाषण स्पीच की जो कॉपी दी गई थी उसमें भेजी गई उसमें मनरेगा की जगह लाए गए नए G राम G बिल की खामियां बताई गई थीं, साथ ही केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर निशाना बनाया गया था। राज्यपाल ने अभिभाषण से ऐसी लाइनें हटाने को कहा जिससे राज्य और केंद्र सरकारों के बीच विवाद की स्थिति बने। जब सरकार की ओर से राज्यपाल के सुझाव को नहीं माना गया तो उन्होंने अभिभाषण देने से इनकार कर दिया।
राज्यपाल ने सभी सदस्यों का अभिवादन करते हुए कहा सिर्फ इतना कहा कि कर्नाटक विधानमंडल के एक और संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए मुझे हर्ष की अनुभूति हो रही है। राज्य की आर्थिक, सामाजिक और भौतिक विकास की गति को दोगुना करने के लिए मेरी सरकार प्रतिबद्ध है। जय हिंद, जय कर्नाटक। इसके बाद वो सदन से बाहर चले गए। वहीं इस पूरे मामले में कर्नाटक सरकार में मंत्री एमसी सुधाकर ने कहा, लोकतंत्र के लिए यह एक दुखद दिन है। सरकार कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।
आपको बता दें कि अभी एक दिन पहले ही दक्षिण के एक और राज्य तमिलनाडु में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी। वहां राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा में राष्ट्रगान चलाने का अनुरोध किया मगर विधानसभा अध्यक्ष ने उनके अनुरोध को अस्वीकार किया जिसके बाद राज्यपाल ने राष्ट्रगान का आरोप लगाया और अभिभाषण दिए बिना ही सदन से वॉकआउट कर दिया था। इसके अलावा केरल में भी राज्यपाल ने अभिभाषण के दौरान कुछ अंश नहीं पढ़े थे।
