सिख विरोधी दंगों से जुड़े हिंसा के एक मामले में सज्जन कुमार बरी, राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनाया फैसला
नई दिल्ली। 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली के जनकपुरी, विकासपुरी इलाकों में हुई हिंसा मामले आरोपी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को अदालत ने बरी कर दिया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि हिंसा में आरोपी की भूमिका साबित करने में अभियोजन नाकाम रहा है। जनकपुरी, विकासपुरी इलाकों में हुई हिंसा में दो लोगों की मौत हुई थी। कोर्ट में सज्जन कुमार ने अपना बचाव करते हुए खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि वो हिंसा में शामिल नहीं थे, यहां तक की सपने में भी शामिल नहीं हो सकते हैं।
सज्जन कुमार ने कोर्ट से कहा कि मेरे खिलाफ एक भी सबूत नहीं हैं। अदालत का फैसला सुनकर सज्जन कुमार ने हाथ जोड़कर कोर्ट को धन्यवाद दिया वहीं पीड़ित पक्ष के लोगों ने निराशा जताई और रो दिए। सज्जन कुमार को आज इस मामले में कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद वो जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे क्योंकि दिल्ली दंगों के दौरान सरस्वती विहार में पिता-पुत्र जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह की हत्या के मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने पिछले साल फरवरी में सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आपको बता दें कि 31 अक्टूबर 1984 को दिल्ली में इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी। उनके सिख सुरक्षाकर्मियों ने ही उन पर गोलियां चलाई थीं। इसी के बाद दिल्ली से शुरू हुए सिख विरोधी दंगे पूरे देश में फैल गए थे।
इन दंगों में बहुत से सिखों की जान गई। कितने ही सिखों के घर, दुकानें और संपत्तियों को आग लगा दिया गया था। मोदी सरकार ने केंद्र में सत्ता संभालने के बाद सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए एसआईटी बनाई थी। सिख विरोधी दंगों से जुड़े हिंसा के मामलों में अलग अलग कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। सज्जन कुमार के अलावा कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर भी सिख विरोधी दंगा भड़काने के आरोपी हैं।
