March 10, 2026

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मुश्किल वक्त में भारतीय सेना ने दिया था नीरज चोपड़ा का साथ, फिर गोल्ड जीतकर खिलाड़ी ने रचा इतिहास

टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करके देश को गोल्ड मेडल दिलाने वाले नीरज चोपड़ा पर आज धन की वर्षा हो रही है। आज नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल जीतने पर न सिर्फ हरियाणा बल्कि अन्य प्रदेशों की सरकारें भी करोड़ों की राशि न्योछावर कर रही हैं। लेकिन जिस समय नीरज को प्रोत्साहन और स्नेह की जरूरत थी तो उन्हे सिर्फ भारतीय सेना ने ही उनका आलिंगन किया था। नीरज चोपड़ा ने साल 2016 में जब जूनियर विश्व चैंपियनशिप में भाला फेंकने का रिकार्ड तोड़ा था, तो भारतीय सेना ने ही उन्हें सीधे नायब सूबेदार के पद पर नियुक्त कर दिया था। नीरज चोपड़ा को पुणे में मिशन ओलंपिक विंग और आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था करवाई। सेना की मिशन ओलंपिक विंग प्रतिभाशाली भारतीय खिलाड़ियों को तराशने का काम करती है।

वहीं नीरज के कोच काशीनाथ नायक ने साल 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक हासिल किया था। वह यह सेना ही थी, जिसने एशियाई खेलों में स्वर्णपदक जीतने के बाद अब नीरज को सूबेदार के पद पर पदोन्नत किया था। लेकिन अब यह सवाल उठ रहा है कि नीरज की स्वर्णिम उपलब्धि के बाद सेना उन्हें पदोन्नत करने या उनके लिए किसी पुरस्कार राशि की घोषणा क्यों नहीं गई। जिसका कारण यह कहा जा रहा है कि सेना में पदोन्नति की जो व्यवस्था थी, उसके तहत नीरज को सूबेदार तक पदोन्नोति दी जा चुकी है। वहीं अब आगे उन्हे पदोन्नति देने के लिए सेना को अपने नियमों में परिवर्तन करना होगा।

बता दें कि सेना की सेवा के दौरान ही बीते पांच सालों का लगभग पूरा समय नीरज ने विदेश में प्रशिक्षण लेते हुए बिताया है। इन पांच सालों में वह भआरत में कम ही रहे। इस समय में नीरज को भाला फेंकने का प्रशिक्षण देने के लिए दुनिया के सबसे उत्कृष्ट और महंगे प्रशिक्षक क्लाउस बार्टोनिट्ज़, गैरी कैल्वर्ट, वर्नर डेनियल की सेवाएं दी गईं। साथ ही विश्व रिकार्ड बनाने वाले दुनिया के सबसे महंगे कोच जर्मनी के उवे हान को उनका प्रमुख प्रशिक्षक बनाया गया।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में किसी भी खिलाड़ी की मानसिक शक्ति बेहतर और अच्छी होना जरूरी है। वहीं ओलंपिक खेलों के दौरान देखा गया कि रेसलिंग के मुकाबलों में किस तरह पहलवान आखिर के क्षणों में जीत को हार में बदल बैठे। लेकिन सेना ने नीरज का आत्मविश्वास बढ़ाने में काफी मदद की, जिसकी बदौलत वह स्वर्ण पदक जीत पाने में सफल हुए।

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