July 15, 2026

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भ्रष्टाचारियों ने शिक्षा के मंदिर को भी बना दिया धन कमाने का अड्डा

हिंद फॉक्स न्यूज /गौतम बुध नगर :- गरीब बच्चों के लिए शिक्षा लेना पहले ही अभिशाप था वही अब शिक्षा से जुड़े निजी संस्थाओं ने शिक्षा को अपनी कमाई का धंधा बना दिया है आप सभी जानते हैं शिक्षा का व्यापार इन दोनों हमारे देश में खूब फल फूल रहा है हाल फिलहाल में जिनके बच्चों ने 12वीं कक्षा पास की है उनके लिए अपने बच्चों को आगे पढ़ पाना अति मुश्किल व संघर्ष भरा है क्योंकि शिक्षा ग्रहण करने के लिए जो फीस आपको चुकानी पड़ती है उसका मूल्य दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है जिसकी तरफ ना तो किसी सरकार और ना ही प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान जाता है।

शिक्षा में भ्रष्टाचार की पुष्टि के लिए हमारे संवाददाता उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में निजी कॉलेजों में जाकर वहां का हाल जानने की कोशिश की और बाकायदा एक कॉलेज में जाकर फॉर्म भरा बच्चों की परसेंटेज लिखी और खुद काउंसलिंग के लिए भी गए जहां उन्हें परसेंटेज कम का हवाला देकर अपनी ही दूसरी ही ब्रांच जो वहां से लगभग ढाई सौ किलोमीटर दूर मथुरा में है उसके बारे में बताया कि वहां की फीस भी काम है और प्लेसमेंट यही से होती है और वहां एडमिशन के लिए कह दिया।

अब यहां तक तो फिर भी ठीक था लेकिन गेट से बाहर निकलते ही आसपास में हॉस्टल चला रहे और अपने आप को ऐडमिशन कंसलटेंट बताने वाले हमारे संवाददाता को मिल गए और अपनी गाड़ी में बैठ कर सभी हॉस्टलों के बीच से निकलते हुए सारी जानकारी ली और बताया कि एडमिशन हो जाएगा इसी परसेंटेज पर हो जाएगा लेकिन थोड़े पैसे डोनेशन के रूप में देने होंगे जब हमारे संवाददाता नहीं पैसों के बारे में पूछा तो कंसल्टेंट द्वारा बताया गया कि आपको फीस से अतिरिक्त 7 लख रुपए देने होंगे तो आपका एडमिशन इसी कॉलेज में इसी कोर्स में इसी परसेंटेज के साथ हो जाएगा हमारे संवाददाता द्वारा हिडन कैमरा से उन ऐडमिशन कंसल्टेंट्स की वीडियो फुटेज भी निकली गई, जिसे जल्द ही पास के पुलिस स्टेशन में देकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की जाएगी।

भ्रष्टाचार ने शिक्षा के मंदिरों को इस तरह घेरा हुआ है की गरीब बच्चों के लिए निजी संस्थानों में कोई जगह नहीं है क्योंकि निजी संस्थाओं की फीस लगभग साल की डेढ़ से दो लाख रुपए और उसे पर भी कॉलेज और कॉलेज के बाहर खड़े हुए इस तरीके के फ्री ऐडमिशन कंसलटेंट जो की सात-सात लख रुपए डोनेशन के रूप में लेते हैं तो गरीब का बच्चा किस तरीके से शिक्षा प्राप्त करें यह एक बहुत बड़ा सवाल है इस पर शासन और प्रशासन दोनों को ही ध्यान देना होगा।