नोएडा की हिंसा में बाहरी हाथ होने के सबूत!, दर्जनों सोशल मीडिया अकाउंट्स से अफवाह फैलाकर भड़काने की बात आई सामने
नोएडा। नोएडा में सोमवार को श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और आगजनी मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 7 एफआईआर दर्ज कर 350 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके अलावा कई और से पूछताछ चल रही है। खबर है कि बाहरी लोगों और दर्जनों सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए भड़काने का काम किया गया। इस पर यूपी के डीजीपी राजीव कृष्ण ने अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालात को सामान्य बनाने के लिए नोएडा और गाजियाबाद व आसपास के इलाकों में कड़ी सुरक्षा की गई है। नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने ताजा हालात के बारे में मंगलवार सुबह ये जानकारी दी।
मीडिया की खबरों के मुताबिक नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन मामले में पुलिस ने 50 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट पाए हैं। इन सोशल मीडिया अकाउंट्स से भड़काने और भ्रामक सूचनाएं फैलाई गईं। नोएडा पुलिस की जांच में पता चला है कि इनमें से कई सोशल मीडिया अकाउंट हिंसा से महज 24 घंटे पहले बनाए गए। ऐसे में अब यूपीएसटीएफ को जांच सौंपी गई है। ताकि श्रमिकों के आंदोलन में हिंसा को भड़काने में मदद करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स और लोगों की पहचान की जा सके। नोएडा पुलिस भी सीसीटीवी खंगाल रही है। ताकि उपद्रव करने वालों को पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जा सके। पहली बार नोएडा में श्रमिकों को मिलने वाली सुविधाओं के मुद्दे पर इस तरह आंदोलन और हिंसा हुई।
यूपी सरकार ने नोएडा और अन्य जिलों की फैक्टरियों में काम करने वाले कुशल, अर्धकुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए अंतरिम न्यूनतम वेतन तय कर दिया है। सरकार ने सोशल मीडिया में आई उन खबरों को गलत बताया है कि यूपी में न्यूनतम मजदूरी 20000 रुपए है। सरकार ने कहा है कि वो श्रमिकों के साथ यूपी के उद्योगों की बेहतरी भी देख रही है। इस मामले में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय कमेटी भी बनाई गई है। नोएडा प्रशासन और श्रम विभाग के प्रमुख सचिव ने भी आंदोलनकारी श्रमिकों से बातचीत कर हल निकालने की कोशिश की।
