पाकिस्तान के आम लोगों पर टैक्स की मार पड़ना तय!, जानिए कौन सी कड़ी शर्तें थोपकर आईएमएफ ने 7 अरब डॉलर का कर्ज किया है मंजूर
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के हाथ में भीख का कटोरा कबका आ चुका। इस कटोरे के दम पर ही पाकिस्तान का एक-एक दिन चल रहा है। पाकिस्तान ने पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ से 3 अरब डॉलर कर्ज लिया था। अब एक बार फिर उसने आईएमएफ के सामने कटोरा रखा है। आईएमएफ ने पाकिस्तान को 3 साल के लिए 7 अरब डॉलर का कर्ज देने को मंजूरी तो दी है, लेकिन ऐसी शर्तें थोप दी हैं, जिनका खामियाजा इस्लामी देश की आम जनता को भुगतना पड़ेगा। बता दें कि पहले आईएमएफ ने जो 3 अरब डॉलर का कर्ज पाकिस्तान को देने का फैसला किया था, उसमें से 1.1 अरब डॉलर की अंतिम किस्त भी इस साल की शुरुआत में जारी कर दी थी।
आईएमएफ के मिशन प्रमुख नाथन पोर्टर के नेतृत्व में मुद्रा कोष की टीम ने 13 से 23 मई तक पाकिस्तान के अफसरों से कर्ज पर चर्चा की। इस बारे में आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने बताया है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता बनाने के लिए 2023 में हुए स्टैंड बाय अरेंजमेंट के तहत 7 अरब डॉलर का कर्ज देने पर सहमति हुई है। आईएमएफ ने पाकिस्तान को कर्ज देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025 में कर से राजस्व बढ़ाने की शर्त रखी है। इसके अलावा राजस्व लेने को निष्पक्ष और सरल बनाने, पाकिस्तान को अपना खर्च संतुलित करने, सर्विस टैक्स, सेल्स टैक्स और कृषि पर इनकम टैक्स लगाने की शर्त रखी है। वहीं, मुद्रास्फीति कम करने, निजी क्षेत्र का विकास करने की शर्त भी आईएमएफ ने पाकिस्तान को कर्ज देने के लिए रखी हैं।
आईएमएफ की इन शर्तों से साफ है कि पाकिस्तान की जनता पर टैक्स का बोझ भी अब बढ़ने जा रहा है। बता दें कि आईएमएफ ने जब पहले पाकिस्तान को कर्ज दिया था, तब भी उसने टैक्स वगैरा बढ़ाने की शर्त रखी थी। आईएमएफ से कर्ज लेने के बाद ही पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमत के अलावा बिजली की दरें भी महंगी कर दी थीं। इसका लोगों ने जमकर विरोध किया था। पाकिस्तान में आटा और चीनी जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। बीते दिनों ही एक व्यक्ति पैसा न होने पर अपनी 15 दिन की बेटी का इलाज कराने में नाकाम रहा और उसने बच्ची को जिंदा ही दफना दिया था। अब सबकी नजर इस पर है कि आईएमएफ की कड़ी शर्तों के तहत कर्ज ले रही पाकिस्तान की सरकार अपने आम नागरिकों पर महंगाई का बम कब फोड़ती है।
