June 27, 2026

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भारतीय नौसेना में आज शामिल होगी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली दूसरी पनडुब्बी आईएनएस अरिघात

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना में आज देश की दूसरी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी शामिल होने जा रही है। 6000 टन वजन की आईएनएस अरिघात पनडुब्बी चीन और पाकिस्तान के खिलाफ हिंद महासागर क्षेत्र में तो सुरक्षा देगी ही, साथ ही भारत के इन दुश्मन देशों पर कहर भी बरपा सकेगी। आईएनएस अरिघात से पहले साल 2014 में भारतीय नौसेना ने पहली परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को शामिल किया था। अब आईएनएस अरिघात को शामिल कर भारतीय नौसेना अपनी ताकत में और इजाफा कर रही है।

आईएनएस अरिघात में 3000 किलोमीटर दूरी तक मार करने वाली के-4 मिसाइलें लगी हैं। इस पनडुब्बी में 8 लॉन्च ट्यूब हैं। साथ ही आईएनएस अरिघात में 700 किलोमीटर दूरी तक मार करने वाली के-15 मिसाइलें भी दागने की क्षमता है। आईएनएस अरिघात आम डीजल पनडुब्बियों के मुकाबले तेज रफ्तार से चल सकती है। समुद्र के नीचे अरिघात की रफ्तार 22 से 24 नॉट (समुद्री मील) और समुद्र की सतह पर 12 से 15 नॉट होगी। आईएनएस अरिघात को विशाखापट्टनम जहाज निर्माण केंद्र में बनाया गया है। आईएनएस अरिघात की लंबाई 111.6 मीटर, चौड़ाई 11 मीटर और ऊंचाई 9.5 मीटर है। इसमें सोनार, उन्नत संचार प्रणाली और विकिरण रोधी सुरक्षा व्यवस्था भी है। आईएनएस अरिघात कई महीने तक पानी के नीचे ही रह सकती है।

आईएनएस अरिघात में माइक्रो परमाणु रिएक्टर लगाया गया है। ये रिएक्टर इतनी ऊर्जा देता है कि कोलकाता जैसे शहर को कई महीने तक बिजली की सप्लाई की जा सकती है। आईएनएस अरिघात और आईएनएस अरिहंत के बाद भारतीय नौसेना के लिए 2 और परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां बनाने का काम भी जारी है। साल 2035-2036 तक ये दो और परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियां बनकर तैयार हो जाएंगी। भारत के अलावा अमेरिका, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और चीन के पास ही परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हैं। ऑस्ट्रेलिया की सरकार भी अब अमेरिका से परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी लेने की कोशिश कर रही है।