July 16, 2026

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कश्मीर में M4 राइफल की मौजूदगी से बढ़ी चिंता, आतंकियों की बढ़ती ताकत पर सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में M4 राइफल की उपस्थिति ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सूत्रों के अनुसार, 2021 में अमेरिकी सेना द्वारा अफगानिस्तान से वापसी के बाद छोड़े गए हथियार अब पाकिस्तान से घुसपैठ के जरिए कश्मीर में आतंकियों के पास पहुंच रहे हैं। हाल ही में सुरक्षाबलों ने जम्मू और कश्मीर में एक मुठभेड़ के दौरान M4 कार्बन असॉल्ट राइफल बरामद की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आतंकवादी अब AK-47 के बजाय अत्याधुनिक M4 राइफल का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

आतंकियों की सीसीटीवी में M4 राइफल के साथ तस्वीरें आईं सामने

हाल ही में गंदेरबल जिले में टनल परियोजना में काम कर रहे मजदूरों और कर्मचारियों पर हुए आतंकवादी हमले में सीसीटीवी फुटेज में आतंकियों को M4 राइफल के साथ देखा गया था। इससे यह बात सामने आई कि पाकिस्तान के समर्थन से आतंकियों तक यह खतरनाक हथियार पहुंच रहे हैं। 2017 में हिज्बुल मुजाहिदीन के टॉप कमांडर समीर टाइगर और 2018 में जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर अबु तल्हा के पास से भी M4 राइफल बरामद की जा चुकी है। जब अमेरिकी और नाटो सेना अफगानिस्तान में तैनात थी, तब पाकिस्तान के कराची और अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा से इन राइफलों की सप्लाई होती रही थी। अब ये हथियार कश्मीर में आतंकियों के लिए घातक साबित हो रहे हैं।

M4 राइफल की खासियतें

M4 राइफल एक हल्की, गैस-ऑपरेटेड, एयर-कूल्ड असॉल्ट राइफल है जो प्रति मिनट 700 से 900 राउंड फायर कर सकती है। इसकी मारक क्षमता 500 से 600 मीटर तक है और अधिकतम रेंज 3600 मीटर है। नाइट विजन जैसे फीचर्स से लैस यह राइफल आतंकियों के लिए बेहद घातक साबित हो रही है। जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर और जम्मू के अखनूर सेक्टर में मारे गए आतंकवादियों के पास भी इसी राइफल को बरामद किया गया था।

डिफेंस एक्सपर्ट्स ने जताई गहरी चिंता

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कश्मीर में M4 जैसी अत्याधुनिक राइफलों की मौजूदगी गंभीर खतरा है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने 2021 में अफगानिस्तान छोड़ते समय लगभग 3 लाख छोटे हथियार और हजारों M4 राइफलें सहित 7 बिलियन डॉलर मूल्य के सैन्य उपकरण छोड़ दिए थे, जो अब पाकिस्तान के रास्ते से होते हुए कश्मीर के आतंकियों के पास पहुंच रहे हैं। यह स्थिति क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे की घंटी है।