May 23, 2026

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ट्रूडो की कुर्सी के जाते ही खालिस्तानी प्रोपेगेंडा ध्वस्त, कनाडा की जांच में भारत निर्दोष

नई दिल्ली। कनाडा में गठित एक विशेष जांच आयोग की रिपोर्ट ने भारत विरोधी दुष्प्रचार को करारा झटका दिया है। इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में किसी भी विदेशी सरकार की संलिप्तता साबित नहीं हो सकी है। यह रिपोर्ट निवर्तमान प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के उन आरोपों पर गंभीर सवाल खड़ा करती है, जिनमें उन्होंने भारत पर इस हत्या में शामिल होने का दावा किया था।

जांच आयोग की रिपोर्ट में क्या सामने आया?

कनाडा सरकार द्वारा गठित ‘पब्लिक इंक्वायरी इनटू फॉरेन इंटरफेरेंस इन फेडरल इलेक्टोरल प्रोसेसेस एंड डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस’ नामक आयोग की रिपोर्ट मंगलवार को सार्वजनिक की गई। इस 123 पन्नों की रिपोर्ट में विस्तृत रूप से विश्लेषण किया गया कि क्या इस हत्या में किसी विदेशी सरकार की कोई भूमिका थी। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि किसी भी विदेशी सरकार की भागीदारी का कोई निर्णायक प्रमाण नहीं मिला। रिपोर्ट में बताया गया कि कनाडा के राजनीतिक माहौल और मीडिया में भारत के खिलाफ एक प्रोपेगेंडा फैलाया गया, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि भारत सरकार इस हत्या में शामिल थी।

रिपोर्ट की मुख्य बातें

रिपोर्ट में जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया गया। इसमें यह कहा गया कि, “विदेशी सरकार के साथ कोई निर्णायक संबंध साबित नहीं हो सका।” इस निष्कर्ष से यह स्पष्ट हो जाता है कि ट्रूडो द्वारा लगाए गए आरोपों की कोई ठोस नींव नहीं थी और यह केवल राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित लगते हैं। आयोग की अध्यक्ष मैरी-जोसे होग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, “कई बार भ्रामक प्रचार का उपयोग एक राज्य के खिलाफ बदले की कार्रवाई के रूप में किया जाता है।” इस बयान से यह संकेत मिलता है कि ट्रूडो सरकार ने भारत के खिलाफ दुष्प्रचार को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि ट्रूडो के आरोपों के बाद भारत को लेकर एक गलत सूचना अभियान चलाया गया। मीडिया और कुछ राजनीतिक समूहों ने बिना ठोस प्रमाणों के भारत पर दोष मढ़ने की कोशिश की। रिपोर्ट के अनुसार, जब कनाडा सरकार से इस मामले में सबूत देने की मांग की गई, तो वह ऐसा करने में नाकाम रही। इस मामले का असर भारत और कनाडा के राजनयिक संबंधों पर भी पड़ा। अक्टूबर 2024 में कनाडा ने छह भारतीय राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था, जिसके जवाब में भारत ने भी कनाडा के छह राजनयिकों को वापस भेज दिया था। रिपोर्ट में इस राजनयिक तनाव का भी उल्लेख किया गया और कहा गया कि यह विवाद पूरी तरह से अनावश्यक था, क्योंकि इसके पीछे कोई ठोस सबूत नहीं थे।

ट्रूडो बार-बार सबूत देने में नाकाम

सितंबर 2023 में, जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि कनाडा के पास इस संबंध में ‘विश्वसनीय सबूत’ हैं। हालांकि, जब भारत सरकार ने इन आरोपों को ‘बेतुका और निराधार’ बताते हुए बार-बार कनाडा से सबूत पेश करने की मांग की, तो ट्रूडो ऐसा करने में पूरी तरह असफल रहे। ट्रूडो ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत को इस मामले में घेरने की कोशिश की, लेकिन जब उनसे स्पष्ट प्रमाण मांगे गए, तो वे उन्हें प्रस्तुत नहीं कर सके। अब जांच आयोग की रिपोर्ट ने भी उनके आरोपों की पुष्टि नहीं की, जिससे उनकी सरकार की साख को भारी नुकसान पहुंचा है।

भारत-कनाडा संबंध इस पूरे प्रकरण के कारण अपने सबसे खराब दौर में पहुंच गए। दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्ते भी प्रभावित हुए। कई विशेषज्ञों ने इस मामले को ट्रूडो सरकार की विफल कूटनीति और आंतरिक राजनीतिक समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश के रूप में देखा।

रिपोर्ट को लेकर भारत की प्रतिक्रिया

इस रिपोर्ट के निष्कर्ष भारत के पक्ष में होने के बावजूद भारतीय सरकार ने इस पर असंतोष व्यक्त किया। भारत ने कहा कि कनाडा सरकार लगातार भारतीय मामलों में हस्तक्षेप कर रही थी और खालिस्तानी तत्वों को समर्थन दे रही थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि कनाडा सरकार ने जानबूझकर भारत की छवि खराब करने की कोशिश की। भारत ने यह भी आरोप लगाया कि कनाडा की सरकार अपने देश में खालिस्तानी आतंकवाद को बढ़ावा दे रही थी और इस्लामिक और खालिस्तानी संगठनों को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए मंच प्रदान कर रही थी।

भारत ने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण ने दोनों देशों के रिश्तों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हालांकि, अब जब जांच आयोग की रिपोर्ट ने भारत को क्लीन चिट दे दी है, तो कनाडा सरकार को अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए और भारत के साथ रिश्तों को सुधारने की दिशा में काम करना चाहिए।