न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में 122 करोड़ का घोटाला, पूर्व जनरल मैनेजर पर गबन के आरोप में एफआईआर दर्ज
नई दिल्ली। न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में 122 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला उजागर हुआ है। बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर हितेश प्रवीणचंद मेहता इस रकम के गबन के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। बैंक के जनरल मैनेजर पद पर रहते हुए हितेश मुंबई के दादर दादर और गोरेगांव ब्रांच की जिम्मेदारी संभालते थे। हितेश पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक की दोनों शाखाओं के खातों से 122 करोड़ रुपये गबन कर लिए। बैंक के चीफ अकाउंट्स ऑफिसर ने दादर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई है।
नई दिल्ली। न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में 122 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला उजागर हुआ है। बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर हितेश प्रवीणचंद मेहता इस रकम के गबन के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। बैंक के जनरल मैनेजर पद पर रहते हुए हितेश मुंबई के दादर दादर और गोरेगांव ब्रांच की जिम्मेदारी संभालते थे। हितेश पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक की दोनों शाखाओं के खातों से 122 करोड़ रुपये गबन कर लिए। बैंक के चीफ अकाउंट्स ऑफिसर ने दादर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई है।
वहीं एक जानकारी यह भी सामने आई है कि इस बैंक के 1.3 लाख खाता धारकों में से 90 प्रतिशत से ज्यादा एकाउंट होल्डर ऐसे हैं जिनके खातों में पांच लाख रुपये तक की धनराशि डिपॉजिट है। ऐसे में इन खाता धारकों को बीमा के माध्यम से उनकी पूरी जमा राशि मिल जाएगी। गौरतलब है कि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (डीआईसीजीसी) बैंक में खाता धारकों के 5 लाख रुपए तक की रकम का बीमा करता है। अगर बैंक डूबती है तो 5 लाख तक की रकम धाता धारकों को वापस मिल जाएगी।
