हिंसा के बाद नागपुर के कई इलाकों में कर्फ्यू, 30 पुलिसकर्मी घायल, 60 से ज्यादा उपद्रवी गिरफ्तार
नागपुर। मुगल बादशाह औरंगजेब के नाम पर महाराष्ट्र के नागपुर में जमकर हिंसा हुई। उपद्रवियों ने सोमवार की शाम करीब 7.30 बजे पहले नागपुर के महाल इलाके में हिंसा की। फिर देर रात हंसपुरी इलाके में भी उपद्रवियों ने जमकर पथराव और आगजनी की। तमाम वाहनों को जला दिया गया। हिंसा में 30 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। वहीं, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 60 से ज्यादा उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। नागपुर के महाल और हंसपुरी में हुई हिंसा के मामले में महाराष्ट्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने शांति की अपील के साथ ही उपद्रवियों को न बख्शने की बात कही है। नागपुर के कई इलाकोंं में कर्फ्यू लगाया गया है।
बजरंग दल के लोगों ने सोमवार को औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग करते हुए महाल इलाके में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया था। इसके बाद अफवाह उड़ी कि प्रदर्शन के दौरान धार्मिक किताब को जलाया गया। जिसके बाद बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा हो गए और शाम को महाल में पहले हिंसा हुई। वहीं, बजरंग दल ने इस आरोप को गलत बताया है कि उसके प्रदर्शन के दौरान धार्मिक किताब जलाई गई। बजरंग दल का कहना है कि नागपुर के महाल इलाके में प्रदर्शन के दौरान औरंगजेब का पुतला फूंका गया था।
महाराष्ट्र का नागपुर शहर अर्से बाद हिंसा की आग में झुलसा है। बताया जा रहा है कि नागपुर में आखिरी बार साल 1927 में हिंसा और उपद्रव हुआ था। औरंगजेब की कब्र को हटाने का मसला इतना तूल पकड़ लेगा, इसकी उम्मीद शायद नागपुर पुलिस को भी नहीं थी। हिंसा के बाद अब नागपुर शहर में जगह-जगह बड़ी तादाद में पुलिस की तैनाती की गई है। महाल के बाद हंसपुरी में हिंसा भड़कने के पीछे के कारणों की जांच पुलिस कर रही है। नागपुर पुलिस ने कहा है कि जो भी हिंसा के लिए जिम्मेदार होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
