वक्फ बिल पर नाराज नेताओं के इस्तीफे पर जेडीयू का आया बयान, जानिए नीतीश कुमार की पार्टी ने क्या कहा
पटना। वक्फ संशोधन बिल को नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने भी समर्थन दिया था। जिसके बाद विरोध जताते हुए जेडीयू से कई नेताओं ने इस्तीफा दिया। वक्फ बिल के मसले पर पार्टी से इस्तीफा देने वालों के बारे में कहा गया कि ये सभी वरिष्ठ हैं। अब जेडीयू ने इस बारे में प्रतिक्रिया दी है। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं में शामिल मोहम्मद कासिल अंसारी के बारे में कहा कि वो साल 2020 में एआईएमआईएम के टिकट पर बिहार विधानसभा का चुनाव लड़े थे। जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि साजिश के तहत कहा जा रहा है कि वक्फ बिल का समर्थन करने के कारण जेडीयू से अल्पसंख्यक खुश नहीं हैं।
दरअसल, एनडीए के सहयोगियों में जेडीयू ऐसी पार्टी है, जिसके लोकसभा में 12 सांसद हैं। वहीं, चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी के 16 सांसद हैं। वक्फ बिल आने की जानकारी मिलने के बाद कई मुस्लिम संगठनों और विपक्षी नेताओं ने कहा था कि नीतीश और चंद्रबाबू नायडू को वक्फ बिल का साथ नहीं देना चाहिए। नीतीश और चंद्रबाबू पर दबाव डालने के लिए बिहार की राजधानी पटना और आंध्र प्रदेश में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यानी एआईएमपीएलबी ने धरना भी दिया था। इस दबाव में नीतीश और चंद्रबाबू नायडू नहीं आए। दोनों की पार्टियों ने वक्फ बिल पर मोदी सरकार का समर्थन कर पक्ष में वोट दिया था।
वक्फ संशोधन बिल के संसद में पेश होने से पहले चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि उनकी टीडीपी हमेशा अल्पसंख्यकों के साथ खड़ी है। टीडीपी ने वक्फ संशोधन बिल में कुछ बदलाव के सुझाव दिए थे। उनको शामिल किया गया था। वहीं, नीतीश कुमार की जेडीयू की तरफ से जो सुझाव सरकार को दिए गए, उनको भी वक्फ संशोधन बिल में रखा गया। इस साल बिहार में विधानसभा के चुनाव हैं। ऐसे में विपक्षी दलों के नेता और मुस्लिम नेताओं की तरफ से कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार की जेडीयू को सबक सिखाना है। बता दें कि बिहार में करीब 20 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। बिहार विधानसभा की 48 सीटों पर मुस्लिम वोटर जीत और हार तय करते हैं।
