May 2, 2026

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संभल जामा मस्जिद एक संरक्षित स्मारक है, धार्मिक स्थल नहीं, एएसआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दी जानकारी

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित शाही जामा मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया है कि यह मस्जिद एक संरक्षित स्मारक है। यह कोई धार्मिक स्थल नहीं है। मस्जिद कमेटी की ओर से ट्रायल कोर्ट के 19 नवंबर 2024 को मस्जिद के सर्वेक्षण संबंधी दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी जिस पर सुनवाई के दौरान एएसआई ने यह दलील दी। हालांकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

जामा मस्जिद इंतेजामिया कमेटी ने याचिका में कहा कि 19 नवंबर 2024 की दोपहर को सिविल जज कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया गया था और कुछ ही देर बाद मस्जिद के सर्वेक्षण का आदेश दे दिया गया। अदालत ने सर्वेक्षण की रिपोर्ट भी 29 नवम्बर तक जमा करने को कहा। यह आदेश सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आदित्य सिंह ने महंत ऋषिराज गिरि सहित आठ अन्य वादियों द्वारा दायर मामले में दिया गया। इनका कहना है कि यहां पूर्व में हरिहर मंदिर था जिसको ध्वस्त करने के बाद 1526 में मस्जिद का निर्माण कराया गया। वहीं अधिवक्ता हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन के द्वारा भी दायर याचिका दायर की गई है।

सिविल कोर्ट के निर्देश के बाद 24 नवम्बर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान संभल में हिंसा भड़क गई। इसमें चार लोगों मौत हो गई थी जबकि कई अन्य घायल हुए थे। घायलों में कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब तक सर्वेक्षण आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका हाईकोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध नहीं हो जाती तब तक ट्रायल कोर्ट मामले में आगे नहीं बढ़ेगा और यथास्थिति बनाए रखेगा।

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