April 19, 2026

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बांग्लादेश में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी फिर राजनीतिक दल बना, सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रेशन बहाल किया

ढाका। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से लगातार वहां कट्टरपंथियों की पौ बारह हो रही है। कट्टरपंथी जेल से छूट भी रहे हैं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की भी तमाम घटनाएं हुई हैं। अब एक और विवादित कदम के तहत बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट ने कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी को राजनीतिक दल की मान्यता देने का आदेश दिया है। बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट ने जमात-ए-इस्लामी का रजिस्ट्रेशन बहाल कर दिया है। इससे पहले बांग्लादेश के एक हाईकोर्ट ने जमात-ए-इस्लामी का राजनीतिक दल के तौर पर रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था। बांग्लादेश की मीडिया के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने देश के चुनाव आयोग को ये भी कहा है कि जमात-ए-इस्लामी संबंधी उसके आदेश को तत्काल लागू किया जाए।

बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सैयद रफात अहमद की अध्यक्षता वाली 4 जजों की बेंच ने कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी को फिर राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता देने का आदेश जारी किया। इसी बेंच ने कुछ दिन पहले ही जमात-ए-इस्लामी के नेता एटीएम अजहरुल इस्लाम को बरी कर दिया था। जबकि, उसे 1971 के बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौर में मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने मौत की सजा सुनाई थी। एटीएम अजहरुल इस्लाम को 1256 लोगों की हत्या और 13 महिलाओं से रेप का दोषी पाया गया था। इससे साफ हो रहा है कि बांग्लादेश में मौजूदा सरकार और कोर्ट को अंतरराष्ट्रीय नियम कानूनों के पालन की भी कोई फिक्र नहीं है।

बांग्लादेश के एक हाईकोर्ट ने 1 अगस्त 2013 को जमात-ए-इस्लामी की राजनीतिक दल की मान्यता खत्म कर दी थी। इसके बाद बांग्लादेश हाईकोर्ट ने साल 2018 में इस बारे में आदेश पास किया था। जमात ने चुनाव आयोग के फैसले को हाईकोर्ट की बड़ी बेंच में चुनौती दी थी, लेकिन संगठन के वकील के पेश न होने पर कोर्ट ने नवंबर 2023 में जमात की अपील खारिज कर दी थी। शेख हसीना के बांग्लादेश से पलायन के बाद जमात-ए-इस्लामी ने अपनी राजनीतिक दल की मान्यता बहाल कराने के लिए बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और कोर्ट ने उसकी याचिका मान ली। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने आदेश जारी कर पहले ही जमात-ए-इस्लामी और इसके छात्र संगठन इस्लामी छात्र शिबिर पर लगा बैन खत्म कर दिया था। जमात और उसके छात्र संगठन को साल 2009 में शेख हसीना सरकार ने कट्टरपंथी गतिविधियों के कारण बैन किया था।

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