April 24, 2026

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देश में कोरोना के मरीजों की संख्या में 500 से ज्यादा की बढ़ोतरी, दिल्ली के 5 साल के बच्चे समेत इतनों की कोविड-19 वायरस ने ली जान

नई दिल्ली। कोरोना का वायरस अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। बीते 24 घंटे में देश में कोविड-19 वायरस से पीड़ित होने वाले मरीजों की संख्या में और 564 का इजाफा हो गया। अब देश में कोरोना के कुल मरीजों की संख्या 4866 हो गई है। जबकि, बीते 24 घंटे में 3955 कोरोना मरीज ठीक भी हुए हैं। दिल्ली में बीते 24 घंटे में 105 नए कोरोना मरीज मिले हैं। वहीं, कर्नाटक में 112 और केरल में 114 नए कोविड-19 के मरीज मिले।

पश्चिम बंगाल में कोरोना के नए 106 मरीज मिले हैं। कोरोना की ताजा लहर के बाद से केरल में सबसे ज्यादा 1487 लोग कोरोना पीड़ित हो चुके हैं। वहीं, दिल्ली में कोरोना मरीजों की कुल संख्या 562, पश्चिम बंगाल में 538 और कर्नाटक में 436 हो चुकी है। महाराष्ट्र में कुल कोरोना मरीजों की संख्या 16 नए मरीजों के साथ 526 हो गई है।

कोरोना यानी कोविड-19 वायरस से बीते 24 घंटे में 7 मरीजों ने जान गंवाई है। दिल्ली में 5 साल के बच्चे की जान कोरोना से गई है। इसके अलावा 87 साल की बुजुर्ग महिला की भी कोरोना से मौत हुई। वहीं, कर्नाटक में 65 साल के बुजुर्ग और 42 साल के पुरुष की भी जान कोरोना ने ले ली। महाराष्ट्र में 3 मौतें हुई हैं। इनमें 79 साल की महिला और 76 साल की उम्र के 2 पुरुष हैं। जिन बालिगों और बुजुर्गों की जान कोविड-19 वायरस ने ली, वे पहले से गंभीर बीमारियों के शिकार रहे हैं। जबकि, दिल्ली में जान गंवाने वाले बच्चे को सेप्सिस भी हो गया था। इस तरह अब कोरोना की ताजा लहर में देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 51 हो चुकी है।

कोरोना की ताजा लहर कोविड-19 वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब वैरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 के कारण आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने NB.1.8.1 को वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग माना है। वहीं, कोरोना वायरस के JN.1 वैरिएंट के मरीज पिछले कुछ साल में ज्यादा थे। JN.1 वैरिएंट में ही म्यूटेशन के बाद दो नए सब वैरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 आए। JN.1 वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में कुछ म्यूटेशन यानी बदलाव देखे गए हैं। इसकी वजह से कोरोना वायरस के अन्य वैरिएंट्स की तुलना में NB.1.8.1 और LF.7 सब वैरिएंट अधिक संक्रामक हैं। खास बात है कि दोनों सब वैरिएंट्स की वजह से वैक्सीन लगवाने वालों को भी बीमारी से ग्रस्त होना पड़ रहा है। इसकी वजह कोरोना के वैरिएंट्स में स्पाइक प्रोटीन का बदलना है।

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