‘शांति के लिए ईरान में इस्लामी शासन खत्म करना जरूरी’, अयातुल्लाह अली खामनेई के भतीजे महमूद मोरदखानी का बयान
पेरिस। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई इजरायल से जंग लड़ने पर आमादा हैं। वहीं, उनके निर्वासित भतीजे महमूद मोरदखानी ने कहा है कि ईरान में शांति के लिए वहां इस्लामी शासन का खत्म होना जरूरी है। मोरदखानी ने बुधवार को एक इंटरव्यू में कहा कि वो जंग के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन जो भी इस शासन को मिटा सके, वो किया जाना जरूरी है। मोरदखानी ने कहा कि जब हम यहां तक आ गए हैं, तो ये करना ही होगा। महमूद मोरदखानी ने अपने चाचा खामनेई की नीतियों के खिलाफ हमेशा आवाज उठाई और 1986 में ईरान से फ्रांस चले गए थे।
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामनेई के भतीजे ने कहा कि ईरान में विस्तारवादी शासन है। ये शासन इलाके के बड़े हिस्से पर कब्जा करना चाहता है। महमूद मोरदखानी ने कहा कि ईरान की इस्लामी सरकार सुन्नियों के खिलाफ शिया समुदाय का साम्राज्य बनाने का इरादा रखता है। उन्होंने कहा कि इस वजह से ईरान की मौजूदा इस्लामी सरकार को खत्म करना जरूरी है। मोरदखानी पहले भी इस तरह के बयान देते रहे हैं। वो अपने चाचा अयातुल्लाह अली खामनेई के विचारों से कभी सहमत नहीं रहे। जबकि, खामनेई ईरान को मध्य-पूर्व का सबसे ताकतवर देश साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं।
इजरायल और ईरान के बीच जंग को सात दिन हो चुके हैं। न तो इजरायल और न ही ईरान अपने कदम पीछे खींचने के लिए तैयार दिख रहे हैं। इजरायल के हमलों में अब तक ईरान में 600 से ज्यादा लोगों की जान गई और 1300 के करीब लोग घायल हुए हैं। वहीं, ईरान के मिसाइल हमलों के कारण इजरायल में करीब 30 लोगों की मौत हुई है और दर्जनों घायल हुए हैं।
इजरायल और ईरान की जंग में अब अमेरिका के भी कूदने के आसार दिख रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की इस्लामी सरकार के खिलाफ युद्ध लड़ने का फैसला कर लिया है। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करे। वहीं, ईरान का कहना है कि वो परमाणु हथियार नहीं बना रहा और इजरायल ने परमाणु मसले पर बातचीत को पटरी से उतारने के लिए उस पर हमला किया है।
